आयरन एंड स्टील उद्योग पर निबंध | Essay on Iron and Steel Industry in Hindi!

धातु उद्योगों में लोहे और इस्पात का उद्योग सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है । लोहा एक मजबूत धातु है, जिसमें भारी लचक पाई जाती है और जिसको बारीक तारो का रूप दिया जा सकता है ।

लोहे और इस्पात के कारखानों की अवस्थिति के निर्धारक निम्नलिखित हैं:

i. खनिज लोहे की उपलब्धि (Availability of Iron Ore):

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लोहे खनिज एक भारी अशुद्ध खनिज है जिसकी ढलाई में अधिक भाड़े का खर्च आता है इसलिए इसके कारखाने प्रायः उन्हीं स्थानों में लगाये जाते हैं जहाँ खनिज लोहे की खानें हों ।

ii. कोयले की उपलब्धि (Availability of Coal):

लोहे-इस्पात उद्योग में उत्तम प्रकार के कोयले की आवश्यकता होती है जिसको कोक में बदलाव किया जा सके । खनिज लोहे को पिघलाने में कोक का उपयोग किया जाता है ।

iii. तटीय स्थिति (Coastal Location):

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आयात-निर्यात को ध्यान में रखते हुए बहुत-से लोहे तथा इस्पात के कारखाने बंदरगाहों के निकट लगाये जाते हैं । आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, यू॰एस॰ए॰, स्पेन तथा स्कॉटलैंड (ग्लासगो) में लोहे इस्पात के कारखाने तटीय स्थानों पर हैं । भारत में विशाखापट्‌टनम इस्पात कारखाना बंदरगाह के निकट स्थित है ।

विश्व के लोहे व इस्पात के प्रमुख औद्योगिक केंद्र:

लोहे तथा इस्पात का उद्योग विकसित एवं विकासशील देशों में विभिन्न स्थानों पर अवस्थित है । विश्व के कुछ प्रमुख लोहे-इस्पात के कारखानों का विवरण तालिका 10.4 में प्रस्तुत किया गया है ।