कपड़ा उद्योग पर निबंध | Essay on Textile Industry in Hindi.

Essay # 1. कपड़ा वस्त्र उद्योग का अर्थ (Meaning of Textile Industry):

कपड़ा वस्त्र उद्योग में सूती, ऊनी, रेशमी तथा कृत्रिम वस्त्र उद्योग शामिल हैं । कपड़ा उद्योग विश्व के सबसे पुराने उद्योगों में से एक है । इस उद्योग में शुद्ध कच्चे माल का उपयोग होता । शुद्ध कच्चे माल का वजन और उसके उत्पादन कपड़े का वजन बराबर होता है ।

कपड़ा उद्योग की स्थापना पर परिवहन भाड़े का भारी प्रभाव पड़ता है । इस शुद्ध कच्चे माल को कारखाने के कपास उत्पादन क्षेत्र में लगाया जा सकता है अथवा बाजार (नगर) में लगाया जसतस है जहाँ कपड़ा बेचा जाएगा ।

आधुनिक वस्त्र उद्योग की उत्पत्ति एवं विकास ब्रिटेन में हुआ था, जहाँ रुई से धागा तैयार करने वाली मशीन का आविष्कार हुआ था । ब्रिटेन से सूती कपड़ा तैयार करने वाली मशीनें, यूरोप के अन्य देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान एवं भारत पहुँची । वर्तमान में वस्त्र उद्योग विश्व का सबसे अधिक विस्तृत उद्योग है ।

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वस्त्र उद्योग के विस्तृत एवं विश्वव्यापी होने के निम्न कारण हैं:

(i) कपड़ा एक आधारभूत आवश्यकता है – कपड़ा प्रत्येक व्यक्ति की माँग है । इसकी माँग सदैव बनी रहती है ।

(ii) मशीनीकरण (Mechanization) – मशीनों की सहायता से अनपढ श्रमिक भी कपड़ा बुन सकता है ।

(iii) कपास का उत्पादन विश्व के बहुत-से देशों में किया जाता है ।

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(iv) धागा जल्द नष्ट होने वाली वस्तु नहीं है ।

(v) इसके कच्चे माल और पक्के माल (कपड़े) का ढुलाई भाड़े में विशेष अंतर नहीं होता ।

Essay # 2. विश्व में सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry in World):

विश्व में सूती वस्त्र उद्योग विशेषतः संयुक्त राज्य अमेरिका ब्रिटेन, चीन, सेंट्रल एशियन गणतंत्र, मिस्र, इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, नीदरलैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस, यूक्रेन, थाइलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपाइन, श्रीलंका, पाकिस्तान, म्यांमार, अर्जेटाइना, कोलंबिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड़ इत्यादि ।

Essay # 3. भारत में सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry in India):

भारत में सूती वस्त्र उद्योग बहुत पुराना है । ढाके की मलमल विश्व भर में प्रसिद्ध थी । भारत में सूती वस्त्र का आधुनिक कारखाना 1818 में कलकत्ता (कोलकाता) के निकट फोर्ट गलोस्टर स्थान पर लगाया गया था, परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो पाया था ।

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तत्पश्चात् 1851 में मुंबई में सूती वस्त्र का कारखाना लगाया गया । 1958 में मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, शोलापुर, कोल्हापुर, कानपुर, नागपुर, मद्रास, चेन्नई, कोयंबटूर, इरोडे, मदुरई, तूतीकोरिन, अल्वे, एलप्पी, कोची तथा त्रिचुर में सूती वस्त्र के कारखाने लगाये गये ।

भारत में सूती वस्त्र के प्रमुख औद्योगिक केंद्र मुंबई, अहमदाबाद, बड़ोदरा, सूरत, भावनगर, राजकोट, शोलापुर, नागपुर, पुणे, भोपाल, रतलाम, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, आगरा, बरेली, कानपुर, मेरठ, मोदीनगर, मुरादाबाद, हाथरस, वाराणसी, हावडा, कोलकाता, मुर्शिदाबाद, पटना, अमृतसर, लुधियाना, फगवाड़ा, हिसार, भिवानी, बियावर, भीलवाड़ा, बैंगलूरू, मैसूर, पांडिचेरी, चेन्नई, कोयंबदूर, इरोडे, अल्वे, कोची तथा त्रिचुर इत्यादि ।

निर्यात (Export):

भारत का विश्व में कपड़ा निर्यात में दूसरा स्थान है । भारत से सूती वस्त्र रूस, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली संयुक्त राज्य अमेरिका, नार्वे, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, नेपाल, इथोपिया, केन्या, सऊदी-अरब तथा खाड़ी के देशों को निर्यात करता है ।

Essay # 4. सूती वस्त्र उद्योग की समस्याएँ (Problems of Cotton Textile Industry):

भारत का सूती वस्त्र उद्योग बहुत-सी समस्याओं का सामना कर रहा है ।

इस उद्योग की प्रमुख समस्याओं का वर्णन निम्न में दिया गया है:

i. कच्चे माल का अभाव:

सूती वस्त्र उत्पादन में कच्चे माल की भागीदारी 35% होती है । भारत में उत्तम प्रकार की कपास का अभाव है । भारत लंबे रेशे वाली कपास का आयात मिस्र, सूडान, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तथा संयुक्त राज्य अमेरिका से करता है ।

ii. पुरानी मशीनें (Obsolete Machinery):

भारत के अधिकतर सूती वस्त्र कारखानों की मशीनें पुरानी हैं, जिनकी क्षमता कम है तथा उत्पादन की गुणवत्ता भी घटिया होती है ।

iii. ऊर्जा की कमी (Shortage of Power):

सूती वस्त्र उद्योग में ऊर्जा की कमी के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।

iv. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्द्धा (Competition in the International Market):

चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया तथा इंडोनोशया से विश्व बाजार में भारी प्रतिस्पर्द्धा है ।

v. घाटे में चल रहे सूती वस्त्र कारखाने (Sick Mills):

भारत में सौ से अधिक कपड़े के कारखाने घाटे में चल रहे हैं जिनको वित्तीय सहायता की आवश्यकता है ।

vi. हड़ताल एवं तालाबंदी (Strikes and Lockout):

श्रमिकों की बार-बार हड़ताल तथा कारखानों के मालिकों के द्वारा तालाबंदी का भी उत्पादन पर खराब प्रभाव पड़ता है ।

vii. आधुनिकीकरण की मंद गति:

सूती वस्त्र कारखानों की पुरानी मशीनों के स्थान पर नई मशीनों के लगाने का कार्य बहुत मंद गति से हो रहा है ।

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