Read this article in Hindi to learn about:- 1. विकेंद्रीकरण का अर्थ (Meaning of Decentralisation) 2. विकेंद्रीकरण के प्रकार (Types of Decentralisation) 3. उपागम (Approaches) 4. लाभ (Benefits) 5. दोष (Defects) 6. दर का मापन (Measuring the Rate).

विकेंद्रीकरण का अर्थ (Meaning of Decentralisation):

विकेंद्रीकरण मूलतः लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है, स्वशासन का अधिकार देना ।

फेयोल के अनुसार- ”विकेंद्रीकरण में अधीनस्थों की शक्ति बढ़ती जाती है ।” इसमें निम्न स्तरों तक सत्ता और शक्ति का उत्तरोत्तर हस्तांतरण होता है ।

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एल.डी. व्हाइट- ”सत्ता का निम्न तल से उच्च तल की ओर हस्तांतरण केंद्रीयकरण है, तथा इसके विपरीत प्रक्रिया विकेंद्रीकरण ।”

विकेंद्रीकरण के पक्ष में तर्क:

1. त्वरित निर्णय और कार्यवाही ।

2. प्रजातान्त्रिक पद्धति ।

विकेंद्रीकरण के प्रकार (Types of Decentralization):

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1. राजनैतिक विकेंद्रीकरण:

राजनैतिक विकेंद्रीकरण में राजनैतिक ढांचे को निम्न स्तर तक ले जाया जाता है अर्थात निर्वाचित जनप्रतिनिधि, संसद या विधानसभा में ही नीति-निर्माण नहीं करते अपितु अपने निकट की राजनैतिक संस्थाओं में बैठकर अपने क्षेत्र के लिए निर्णय लेते हैं । पंचायतीराज राजनैतिक विकेंद्रीकरण का उदाहरण है ।

2. प्रशासनिक विकेंद्रीकरण:

जनता को प्रशासन के साथ संलग्न करना जैसे नगर सुरक्षा समिति, रेलवे सलाहकार समिति । इसके अलावा उच्च प्रशासकों के अधिकारों को निम्न स्तर के कार्मिकों को हस्तांतरित कर देना । जैसे सचिव के अधिकार कलेक्टर को, कलेक्टर के अधिकार तहसीलदार को हस्तांतरित करना ।

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3. कार्यात्मक विकेन्द्रीकरण:

केन्द्रीय सत्ता द्वारा अपने अधिकार किसी विशेषज्ञ संस्था को सौंपना जैसे UGC, सामाजिक कल्याण बोर्ड आदि ।

विकेन्द्रीकरण के उपागम (Approaches of Decentralization):

जेम्स फेजलर ने विकेन्द्रीकरण की अवधारणा के संबंध में प्रचलित उपागमों को चार वर्गों में रखा है:

1. आदर्शात्मक उपागम (Doctrinal):

ये उपागम विकेन्द्रीकरण को स्वयं में साध्य मानती है न कि उद्देश्य प्राप्ति का साधन । इसके अनुसार विकेन्द्रीकरण एक आदर्श व्यवस्था है और सब समस्याओं का समाधान भी ।

2. राजनीतिक उपागम (Political Approach):

ये उपागम विकेन्द्रीकरण को राजनीतिक जरूरतों का परिणाम मानते हैं । इनके अनुसार राजनीति तय करती है कि कितनी विकेन्द्रीत इकाइयां, कितनी कार्य-स्वयत्तता के साथ निर्मित की जाएं । पंचायती राज ऐसे ही राजनीतिक संकल्प का परिणाम है ।

3. प्रशासनिक उपागम (Administrative Approach):

इसके अनुसार विकेन्द्रीकरण का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है । दूसरे शब्दों में त्वरित-निर्णय और त्वरित समस्या समाधान की जरूरत को पूरा करने के लिये विभागों के क्षेत्रीय कार्यालयों को शक्ति संपन्न बनाना । यह उपागम प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण को ही विकेन्द्रीकरण मानता है ।

4. दोहरी-भूमिका उपागम (Dual Role Approach):

इसके अनुसार विकेन्द्रीकरण वस्तुतः क्षेत्रीय प्रशासन में परंपरा और परिवर्तन के संघर्ष के समाधान का एक माध्यम है । प्रशासन द्वारा परंपरागत औपनिवेशिक सामाजिक-आर्थिक ढांचे में लाये जा रहे तीव्र परिवर्तन के कारण यह संघर्ष उत्पन्न होता है । विकेन्द्रीकरण इसके नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

विकेंद्रीकरण के लाभ (Benefits of Decentralization):

यह केन्द्रीकरण की दो प्रमुख कमियों-नियंत्रण की दूरस्थता और केन्द्र में अत्यधिक कार्य बोझ को दूर करता है ।

1. प्रजातंत्र के अनुकूल ।

2. त्वरित कार्यवाही ।

3. स्थानीय क्षेत्र का विकास ।

4. अधीनस्थों में पहलपन की भावना का विकास ।

5. उच्च स्तर या मुख्यालय पर कार्य बोझ कम होता है । इससे वे अधिक महत्वपूर्ण अन्य कार्य जैसे नीति निर्माण या प्रमुख समस्याओं पर विचार आदि में अधिक ध्यान दे सकते हैं ।

6. अनेक कार्यों पर जननियंत्रण स्थापित ।

7. राष्ट्रीय नीतियों का स्थानीय दशाओं के साथ सामंजस्य बनाने का अवसर ।

8. लचीला प्रशासन संभव ।

9. विलंब और लालफीताशाही को दूर कर प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि करता है ।

10. निर्णय निर्माण और क्रियान्वयन में विभिन्न इकाइयों की सहभागिता के प्रयोग को संभव करता है ।

11. प्रत्येक स्तर पर कागजी कार्यवाही को कम कर संप्रेषण के भार को कम करता है ।

12. संगठन के विकास और विस्तार में सहायक ।

13. अधीनस्थों में आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना में वृद्धि करता है ।

विकेंद्रीकरण के दोष (Defects in Decentralization):

1. प्रशासनिक एकरूपता भंग ।

2. आपातकालीन परिस्थितियों में अनुपयुक्त ।

3. अपव्ययी ।

4. भ्रष्टाचार का बढ़ना ।

5. नियंत्रण का कमजोर होना ।

6. स्थानीय राजनीति का दुष्प्रभाव ।

7. राष्ट्रीय हित की उपेक्षा ।

विकेन्द्रीकरण की दर का मापन (Measuring the Rate of Decentralization):

कोई संगठन कितना या किस सीमा तक विकेन्द्रीकरण है, इसको मापने के कतिपय मापदंड अपनाये जाते हैं ।

ऐलन के अनुसार इसके दो आधार हैं:

1. सत्ता का स्वरूप जिसका प्रत्यायोजन किया गया है और

2. उसकी सुसंगता ।

अर्नेस्ट डेल ने ”प्लानिंग द कंपनी आर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर” में चार मापदण्ड बताये हैं:

1. निर्णयों की संख्या – अधीन स्तरों पर यदि अधिक संख्या में निर्णय लेने की सत्ता मौजूद है तो उस संगठन में विकेन्द्रीकरण की दर अधिक है ।

2. निर्णयों की महत्ता – अधिक महत्वपूर्ण निर्णय निम्न स्तरों पर लिये जाते हों, तो संगठन में विकेन्द्रीकरण की दर अधिक होगी ।

3. निर्णयों का प्रभाव – निम्न स्तरों पर संपन्न निर्णयों का अधिकाधिक कार्यों पर प्रभाव पड़ता है तो वह संगठन अधिक विकेन्द्रीत है ।

4. निर्णयों की जांच- निम्न स्तरों पर लिये गये निर्णयों को लागू करने की स्वतंत्रता जितनी अधिक होगी, अर्थात् उनकी जांच कम से कम होगी, विकेन्द्रीकरण की दर वहां अधिक होगी ।