Read this article in Hindi to learn about the criteria for cost-benefit analysis of a project.

अर्थशास्त्रियों ने लागत लाभ विश्लेषण के लिये अनेक निर्णय नियम अथवा मानदण्ड बनाये हैं ।

इनका वर्णन नीचे किया गया है:

1. शुद्ध वर्तमान मूल्य मानदण्ड (Net Present Value Criterion (NPV)):

परियोजना मूल्यांकन के लिये यह एक महत्वपूर्ण मानदण्ड है । NPV = लाभ का वर्तमान मूल्य – लागतों के संचालन और कायम रखने का वर्तमान मूल्य – आरम्भिक व्यय । इसका वर्णन लाभों के मानदण्ड के शुद्ध वर्तमान मूल्य के रूप में भी किया जाता है ताकि-लाभ की NPV = लाभों का सकल वर्तमान मूल्य – लागतों का सकल वर्तमान मूल्य यदि NPV > O तब परियोजना सामाजिक रूप में लाभप्रद है । यदि अनेक परस्पर भिन्न परियोजनाएं हैं, तो वह परियोजना चुना जायेगी जिसके लाभों का शुद्ध वर्तमान मूल्य उच्चतम होगा । NPV मापदण्ड परियोजना मूल्यांकन के लिये परिशुद्ध विधि नहीं है क्योंकि यह समय सीमा की उपेक्षा करता है ।

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पूंजी निवेश कुछ समय के पश्चात् लाभ उपलब्ध करते हैं । इसलिये भविष्य के लाभ और लागतों को वर्तमान लाभों और लागतों के बराबर नहीं किया जा सकता । अत: भविष्य की लागतों और लाभों को छूट देना आवश्यक हो जाता है क्योंकि समाज वर्तमान को भविष्य से अधिक वरीयता देता है ।

छूट कारक का वर्णन निम्नलिखित अनुसार किया जाता है:

जहां-

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i = सामाजिक छूट दर

t = समय अवधि

अत:

B1, B2 → Bn कुल वर्तमान लाभों की श्रेणियां वर्ष 1, 2 – n में

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C1, C2 → Cn कुल वर्तमान लागतों की श्रेणियां वर्ष 1, 2 – n में

i → छूट का सामाजिक दर

केवल उन्हीं परियोजनाओं का चयन किया जाना चाहिये जिनमें लाभों का वर्तमान मूल्य लागतों के वर्तमान मूल्य से अधिक होता है अर्थात्-

परियोजना के चयन के लिये लाभ के वर्तमान मूल्य का लागत के वर्तमान मूल्य से अनुमान 1 से बड़ा होना चाहिये अर्थात्-

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2. प्रतिफल मानदण्ड का आन्तरिक दर (Internal Rate of Return Criterion):

यह मानदण्ड परियोजनाओं के लाभों और लागतों के बहावों में अस्पष्ट प्रतिफल की दर के प्रतिशत के संदर्भ में होता है । मार्गलिन (Marglin) प्रतिफल के आन्तरिक दर (IRR) को उस छूट दर के रूप में परिभाषित करता है जिस पर प्रतिफल का वर्तमान मूल्य – लागत = 0 है ।

IRR की गणना के लिये निम्न गणितीय सूत्र है:

r → प्रतिफल का आन्तरिक दर

परस्पर अनन्य परियोजनाओं के प्रकरण में चुने जाने वाली परियोजना के प्रतिफल का दर उच्चतम होना आवश्यक है ।

परन्तु इस मानदण्ड की कुछ सीमाएं है जो नीचे दी गई हैं:

1. परियोजना की लाभप्रदता की गणना के लिये कल्पित प्रतिफल की दर को परिवर्तित करना सम्भव नहीं है ।

2. लम्बी अवधि वाली परियोजनाएं जो कई वर्षों तक लाभ नहीं देतीं उनके प्रतिफल दर की गणना कठिन है ।

3. उच्च पूंजी गहन परियोजनाओं के लिये यह मानदण्ड प्रयोज्य नहीं है ।

4. उन परियोजनाओं में IRR की गणना कठिन है जिसमें कुल निवेश व्यय प्रथम काल में नहीं किया जा सकता ।

5. सार्वजनिक व्यय के लिये IRR का प्रयोग ठीक निर्णयों की ओर नहीं ले जाता क्योंकि प्रतिफल की आन्तरिक दर पर सार्वजनिक व्यय के मध्यवर्ती लाभों और लागतों पर छूट सम्भव नहीं ।

6. दो वैकल्पिक निवेशों के बीच उनके वैकल्पिक (आन्तरिक प्रतिफल की दर) IRR के आधार पर चुनाव करना कठिन है ।

7. लायार्ड (Layard) उन परियोजनाओं में पूंजी नियन्त्रण की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करता है जहां परियोजनाओं का चुनाव प्रतिफल के दर की क्रमावस्था अनुसार नहीं किया जा सकता । ऐसी परियोजनाओं का चयन केवल उनके वर्तमान शुद्ध मूल्य के आधार पर ही किया जा सकता है ।

वास्तव में IRR छूट की सामाजिक दर पर निर्भर करता है । परियोजना का चयन छूट दर पर निर्भर करेगा यदि परियोजनाओं में शुद्ध वर्तमान मूल्य प्रदत्त हो । इसे रेखा चित्र 5.4 की सहायता से वर्णित किया जा सकता है ।

छूट की दर को X अक्ष के साथ मापा गया है और NPV को Y अक्ष पर I वक्र II1 परियोजना I के निवेश का चित्रण करता है तथा QQ1 परियोजना Q का I परियोजना Q का IRR परियोजना I से बड़ा है क्योंकि छूट दर Or, Or1 से बड़ा है । Oq2 पर, दोनों परियोजनाओं के IRR समान हैं ।

परन्तु यदि छूट दर Oq2 से नीचे गिर जाती है तो परियोजना I का चयन किया जायेगा क्योंकि इसका NPV, ik से ऊँचा है । छूट दर में परिवर्तन के आधार पर चयन को परिवर्तन (Switching) और पुन: परिवर्तन (Reswitching) कहते हैं ।

शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) और प्रतिफल की आन्तरिक दर (IRR) में सम्बन्ध (Relation between NPV and IRR):

सामाजिक छूट दर पर NPV और प्रतिफल की आन्तरिक दर (IRR) दो मानदण्ड है जिनका परियोजनाओं के चयन के लिये प्राय: प्रयोग किया जाता है । NPV और IRR के बीच सम्बन्ध को रेखा चित्र 5.5 की सहायता से दर्शाया गया है ।

जैसे NPV गिरता है तो छूट दर बढ़ती है और एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जब NPV ऋणात्मक हो जाती है वह दर जिस पर NPV धनात्मक से रूणात्मक में बदलती है वह IRR है । परियोजना के चुनाव लिये IRR का डिस्काउन्ट दर से ऊँचा होना आवश्यक है अर्थात r > i ।

रेखाचित्र 5.5 में IRR को विकास के लिये चुने जाने हेतु 10 प्रतिशत लिया जाता है जब तक NPV > 0 तथा r (10 प्रतिशत) > i (5 प्रतिशत) । जटिल परियोजनाओं के लिये यह दो मानदण्ड भिन्न परिणाम दे सकते हैं ।

परन्तु अधिकतर वह अन्तरपरिवर्तनीय होते हैं । NPV मानदण्ड का प्रयोग प्राय: निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों में परियोजना मूल्यांकन के लिये किया जाता है । परन्तु NPV मानदण्ड तकनीकी रूप में बेहतर है, क्योंकि IRR विशेष परिस्थितियों में त्रुटिपूर्ण परिणाम दे सकता है ।

3. छूट की सामाजिक दर (Social Rate of Discount (SRD)):

क्योंकि समाज वर्तमान को भविष्य की तुलना में अधिक पसन्द करता है, इसलिये भविष्य की पीढ़ियों की आय उच्च स्तरों पर होनी सम्भव है । यदि घटती हुये सीमान्त उपयोगिता का नियम संचलित होता है, तो भविष्य की पीढ़ियों को लाभों की एक प्रदत्त मात्रा से उपयोगिता लाभ वर्तमान पीढ़ी के उपभोगिता लाभों से कम होंगे, इसलिये भविष्य के लाभों को डिस्काउन्ट किया जाना आवश्यक है ।

वह दर जिस पर भविष्य के लाभों को वर्तमान लाभों के तुलनायोग्य बनाने के लिये डिस्काउन्ट करना आवश्यक है वह ”सोशल रेट ऑफ डिस्काउन्ट” कहलाता है । अन्य शब्दों में यह ‘प्रीमीयम’ दर है जिसे समाज वर्तमान उपयोग को भविष्य में उपयोग से वरीयता देने के लिये प्रस्तुत करता है । इसे रेखा चित्र 5.6 की सहायता से प्रस्तुत किया गया है ।

वर्तमान उपभोग A1 को क्षैतिज अक्ष के साथ और भविष्य के उपभोग A2 को उर्ध्व अक्ष के साथ लिया गया है । A1A2 बदलाव सीमा अथवा निवेश सम्भावना वक्र है । इसमें दायें से बायें और व्यवस्थित परियोजनाओं की श्रेणी सम्मिलित है जो उनके प्रतिफल के दर के क्रम से है, वर्तमान उपभोग के बलिदान की लागत और प्रतिफल भविष्य के उपभोग का लाभ है ।

समाज अनेक निवेश सम्भावनाओं में से चुनाव करेगी ताकि उच्चतम सामाजिक तटस्थ वक्र S1 पर पहुंच सके । समाज इष्टतम स्थिति पर तब पहुंचता है जब बदलाव वक्र A1A2 इसके सामाजिक तटस्थ वक्र S1 पर बिन्दु G के बराबर होता है ।

बदलाव वक्र की ढलान निवेश पर प्रतिफल के दर का प्रतिनिधित्व करती है और सामाजिक तटस्थवक्र समय प्राथमिकता की दर का प्रतिनिधित्व करती है । अत: सामाजिक डिस्काउन्ट दर का निर्धारण निवेश पर प्रतिफल दर की समानता और बिन्दु G पर समय प्राथमिकता द्वारा किया जाता है ।

सामाजिक डिस्काउन्ट दर समयोपरि स्थिर रहता है “5 प्रतिशत की छूट दर निवेश को दुगने तक ले जा सकती है जैसे कि 10 प्रतिशत का एक उपभोग में समान घटाव के साथ मिलकर ।”

यदि डिस्काउंट दर ऊँची है तो उच्च शुद्ध लाभों वाली लघुकालिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है । दूसरी और जब डिस्काउन्ट दर नीची होती है तो कम शुद्ध लाभों वाली दीर्घकालिक परियोजनाएँ चुनी जाती हैं ।

क्योंकि लाभ और लागतें भविष्य में घटित होते है, उनका वर्तमान शुद्ध मूल्य जानने के लिये उन्हें डिस्काउन्ट किया जाता है अत: उचित दर खोजने की समस्या है जिस पर भविष्य के लाभ डिस्काउन्ट किये जाते है ।

इस प्रयोजन से प्राय: बाजार दर का प्रयोग किया जाता है, परन्तु जहां बाजार में ब्याज के दर की बहुलता होती है यह प्रयोजन के समाधान में असफल होता है अथवा डिस्काउन्ट का निजी और सामाजिक दर स्वीकार नहीं किया जा सकता । अत: उचित दर के चयन के लिये कोई वैज्ञानिक ढंग नहीं है ।

पिगॉर (Pigour) और डॉब (Dobb) सामाजिक समय वरीयता दर के प्रयोग को ‘शुद्ध निकट दृष्टि’ के रूप में मानते हैं । वह दोष लगाते हैं कि लोग ‘दोषपूर्ण दूरदर्शी सुविधा’ के शिकार हैं, यह कारण है कि वह भविष्य के उपयोग से वर्तमान उपभोग को अधिक पसन्द करते हैं ।

परन्तु वे इस विचार को इस आधार पर अस्वीकार करते हैं कि समाज एक निरन्तर वस्तु है और भविष्य की पीढ़ियों के लिये इसका सांझा दायित्व है । इसलिये वे शून्य सामाजिक समय वरीयता दर का पक्ष करते हैं क्योंकि समाज के अनुमान में वर्तमान और भविष्य की समान भारिताएं होनी चाहिए ।

मार्गलीन (Marglin) अनुसार- यह विचार “व्यक्तिगत वरीयताओं की अधिकारवादी अस्वीकृति है” सेन (Sen) और एक्स्टेन (Eckstein) दर्शाते हैं कि मृत्यु का विवेकी भय लोगों द्वारा सकारात्मक सामाजिक समय वरीयता दर रखने के लिये पर्याप्त है ।