बालों के इमल्शन उत्पादों का निर्माण कैसे करें? | Are you planning to manufacture hair emulsion products? Read this article in Hindi to learn about how to manufacture and produce hair emulsion products.

आज ‘बिलक्रीम’ जैसे दूधिया रंग के केशराग आजकल काफी लोकप्रिय हैं ये केशों को साधारण सा चिकना बनाते है, चमक देते हैं, और उन्हें अपनी जगह स्थापित भी रखते हैं । इन ऐमल्शन रूपी केश प्रसाधनों का बनाना बड़ा सरल है । लेकिन बनाने के पश्चात् जो समस्याएं आती है उनका निवारण बड़ा कठिन है ।

जैसे:

(1) ऐमल्शन कुछ दिनों बाद फट जाता है

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(2) ऐमल्शन कुछ दिनों बाद सड़ जाता है ।

ऐमल्शन वर्षों तक भी न फटे इसके लिए ऐमल्शन बनाने वाली स्पेशल मशीनें लगानी पड़ेगी । यदि साधारण यन्त्रों से ऐमल्शन बनाया जाएगा तो वह कुछ दिनों पश्चात् निश्चित रूप से फट जाएगा ।

ऐमल्शन के शीघ्र सडने की संभावना इस लिए बनी रहती है कि इनमें प्राकृतिक वसाएं या मोम तथा कार्बनिक रसायन मिले होते हैं, जो पानी के सम्पर्क में रहने के कारण कुछ दिनों में अवश्य ही सड़ जाती है ।

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अतः इनमें कोई प्रीजर्वेटिव मिलाना अनिवार्य है । एक ही प्रीजर्वेटिव सब फार्मूलों में काम नहीं दे सकता, अतः जिन फार्मूलों से ऐमल्शन बनाया जाय उसके लिए विशेष रूप से प्रीजर्वेटिव का चुनाव करना पड़ेगा ।

बनाने की विधि फार्मूला नं. 1 (Formulation Formula No. 1):

पानी को 75-80° सेंटी गर्म करके इसमे ट्राई ईथानोलएमाइन घोल मिला लिया जाता है । वसाओं व तेलों को भी इसी तापक्रम तक पिघला कर इनमें धार बांधकर उपरोक्त क्षारीय जल मिलाया जाता है । मिश्रण को बराबर चलाते रहना चाहिए और जब इसका तापक्रम 45° सेन्टी रह जाय तो कारबीटोल घोली हुई सुगन्धि मिला देना चाहिए ।

बनाने की विधि फार्मूला नं. 2 (Formulation Formula No. 2):

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बसाओं व तेलों को 75-80° सेन्टी तक पिघला लिया जाता है । और पानी को इस तापक्रम तक गर्म करके हाई ईथानोमाइन इसमें मिला लिया जाता है । पिघले वसीय पदार्थों को धार बांधकर क्षारीय जल में मिलाकर अच्छी स्पीड से चलाया जाता है ।

बालों को घुंघराले बनाने वाले क्रीम को उत्पादन  करना (Manufacturing of Hair Curling Cream):

बालों को घुंघराले करके (बालों में लहरें डालने) का शौक लोगों में काफी है । पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका व इग्लैंड आदि देशों में एक नये फार्मूले से बाल घुंघराले करने वाली क्रीमें आदि बनाई जा रही है, जिनका प्रभाव तुरंत ही पड़ता है और लगाने में भी असुविधा नहीं होती । जिस तरह आम तेल या क्रीम को लगाया जाता है वैसे ही इन्हें भी लगाया जाता है ।

उपर्युक्त बेस में से 68 ग्रेन लेकर इसमें 1 औंस सॉफ्टनर घोल मिलाकर अच्छी तरह चलाया जाता है ताकि सफेद रंग की चिकनी क्रीम बन जाये । सबको मिलाकर लोशन बना लिया जाता है ।

7 ग्राम थायोग्लीकोलिक ऐसिड को 50 सी.सी. पानी में घोल लिया जाता है । एक अन्य बर्तन में 3.5 ग्राम कस्टेलाइन एल्युमिनियम सल्फेट और 3.5 ग्राम रोशन साल्ट को 30 सी.सी. पानी में घोल लिया जाता है । दोनों घोलों को आपस में मिला लिया जाता है । इसमें 15 सी.सी. कन्सन्ट्रेटड अमोनिया और पानी इतना मिलाया जाता है कि समस्त घोल 100 सी.सी. बन जाए ।

बालों को रंगने के लिए आधुनिक ‘हेयर डाई’ (खिजाब) को उत्पादन  करना (Manufacturing of Modern ‘Hair Dye’ for Coloring Hair):

सफेद बालों को सुनहरे या काले अथवा अन्य रंगों में रंगने के लिए जो प्रसाधन काम में लाये जाते हैं उन्हें ‘हेयर डाई’ या खिजाब अथवा ‘केश रंजक’ कहा जाता है । विभिन्न प्रकार के जो खिजाब (हेयर डाई) इस काम के लिए प्रयुक्त किये जाते है ।

उन्हें साधारणतः इन तीन वर्गों में विभावित किया जा सकता है:

1. वनस्पति रंगों से बने खिजाब, जिनमें मेंहदी, अखरोट की छाल, लॉगवुड, कैलोमल तथा नील आदि वनस्पति-उत्पादन मुख्य है- इनमें मेहँदी तो इस काम के लिए काफी वर्षों पूर्व से प्रयुक्त की जा रही है, इसका मुख्य घटक है, जो मेंहदी में 1 से लेकर 11/2 प्रतिशत मात्रा में पाया जाता है ।

नोट:

मेंहदी को ‘पायरोगैलॉल’ के साथ मिलाकर प्रयुक्त करने से हल्के भूरे, गहरे भूरे तथा काले रंग के ‘शेड्‌स’ बन जाते हैं, परन्तु पायरो-गैलॉल थोड़ा विषैला होने के कारण सामान्यत इसे प्रयोग में नहीं लाया जाता इसमें एक त्रुटि यह भी हे कि इसके प्रभाव से चमक भी ठीक नहीं आ पाती । इसी काम के लिए अखरोट की छाल का एक्स्ट्रैक्स (सत्व) भी प्रयोग में लाकर देखा गया है, परन्तु उससे भी अच्छा सन्तोषजनक परिणाम प्राप्त नहीं हो पाया है ।

2. ‘हेयर-डाई’ (खिजाब की दूसरी श्रेणी में धातुओं के लवणों) (Metals Salts) से बने खिजाब आते हैं । इस श्रेणी में ‘सीसे’ से बने यौगिक आमतौर पर बाम आते हैं । इसके अतिरिक्त इस श्रेणी के खिजाबों में सिल्वर, तांबा, निकिल, लोहा और बिस्मथ के कम्पाउंड्‌स भी शामिल किये जा सकते हैं, परन्तु उनका प्रचलन बहुत कम है । दूसरी श्रेणी के खिजाबों के प्रयोग से बालों में मौजूद रहने वाली गन्धक, सम्भवत धातुओं के लवणों को ‘सल्फाइड्‌स’ के रूप में परिवर्तित कर देती है ।

जिसके कारण बाल की सतह के साथ-साथ सफलाइड की एक अत्यन्त महीन तह चढ़ जाती है, जिसके प्रभाव से बालों में एक विशेष प्रकार की चमक आ जाती है जो अच्छी नहीं होती- इसके प्रभाव से बाल भूरभूरे हो जाते हैं और बाद में उन्हें घुंघराले बनाना कठिन है ।

नोट:

इस श्रेणी के खिजाबों का प्रभाव काफी देर बाद प्रगट होता है, इनसे पहले तो बालों को रंग लगभग पीला-सा होता है मगर फिर भूरा तथा अन्त में काला हो जाता है । क्योंकि ऐसे खिजाब एसिड आदि की मिलावट से तैयार किये जाते है, अतः इन्हें प्रयोग में लाने के बाद हाथ इत्यादि अच्छी तरह धो लेने चाहिए ।

 

प्रयोग विधि (Experiment Method):

इस फार्मूले से तैयार किये गये खिजाब को प्रयोग में लाने की विधि इस प्रकार है:

आवश्यकता के समय बालों को ‘शैम्पू’ या साबुन आदि से धोकर तथा सुखाकर यह खिजाब लगाया जाता है- पहले ‘क’ भाग से बना घोल बालों पर लगाया जाता है और उसके कुछ देर बाद ‘ख’ भाग वाला ‘घोल’ लगाते हैं । इसके प्रभाव से बालों की रंगत सलेटापन लिए काली हो जाती है ।

3 तीसरी श्रेणी के अन्तर्गत, आर्गोनिक रंगों में बने खिजाब होते हैं । बाजार में बिकने वाले अधिकांश खिजाब इसी श्रेणी के होते हैं । ये रंग बालों पर तह नहीं चढ़ाते (जैसा कि ‘एसिड या सिल्वर’ आदि के कम्पाउंड्‌स से बने खिजाबों को प्रयोग में लाने से होता है) ये बालों के अंदर समा जाते हैं । अतः इनसे रगे हुए बाल स्वाभाविक से दिखायी पड़ते हैं और इनसे बालों को अपनी इच्छानुसार कई अलग-अलग ‘शेड्‌स’ में रंगा जा सकता है ।

इस विधि श्रेणी के खिजाबों में (जोकि आजकल सबसे अधिक प्रयोग में लाये जाते हैं) सबसे प्रथम नम्बर (Para Phenylene Diamine) का है, जिसे संक्षेप में (पैरा) भी कहते हैं । बालों को उत्कृष्ट ढंग से रंगने के लिए ‘पैरा’ के साथ एक ऑक्सीडाइजिंग कैमिकल भी रहता है ताकि फालतू पैरा और ऑक्सीडाइजिंग, कैमिकल, सिर की त्वचा पर हानिकारक प्रभाव न डाले- इस ऑक्सीडाइजिंग-कैमिकल को ‘डैवलपर’ भी कहते हैं ।

यदि पैरा को अकेले ही प्रयोग में लाया जाय तो सेलेटी रंग तथा काला रंग आ तो जाता है, परन्तु इसके लिए पैरा की अधिक मात्रा इस्तेमाल करनी पड़ती है । यदि मेंहदी जैसे रंग की आवश्यकता हो तो ‘रिसॉर्सिनील’ तथा ‘पायरोगैलॉल’ भी साथ मिलाया जाता है ।

नीचे उन रासायनिक पदार्थों की सूची दी जा रही है जो विभिन्न रंगों के लिए प्रयुक्त किये जा सकते हैं:

1. काले रंग के लिए (Aminophenol)

2. लाल से लेकर भूरे रंग के लिए (Chloro Para Phenylene Diamine)

3. ब्राउन रंग के लिए (Sulpo Para Phenylene Diamine)

इन कैमिकल्स में से ‘Para’ पानी तथा अल्कोहल में घुलनशील है और इससे काला तथा सुन्दर ब्ल्यू ब्लैक रंग प्राप्त होता है, परन्तु यह हानिप्रद है । तीसरा कैमिकल (Sulpo Para Phenylene Diamine) भी पानी तथा हल्कोहल में घुलनशील है औ इससे ब्राउन रंग प्राप्त होता है, परन्तु यह कैमिकल ‘धीमी गति’ से रंगता है ।

इस फार्मूले से तैयार होने वाले घोल को सोल्युशन नम्बर 1 रूप में प्रयुक्त करना है । इसकी 10 सी.सी. की शीशियां भर ली जाती है । ऐसी प्रत्येक शीशी के साथ 4 टिकिया यूरिया पर ऑक्साइड (Urea Peroxide) की भी ‘डैवलपर’ के रूप में सप्लाई की जाती है, यह प्रत्येक टिकिया 9.2 ग्राम वजन की होनी चाहिए ।

इस काम के लिए ‘यूरिया परऑक्साइड’ की टिकियों की बजाय पाउडर के रूप में सप्लाई किया जा सकता है- उस दशा में प्रत्येक के साथ-साथ 2 मात्रा में पाउडर ‘डैवलपर’ के रूप में प्रयोग करने हेतु पैक रहनी चाहिए ।

प्रयोग विधि (Experiment Method):

आवश्यकता के समय थोड़े से पानी में ‘डैवलपर’ घोल लें, इसके लिए बड़ा चम्मच भी काम में लाया जा सकता है । जब ‘डैवलपर’ पूरी तरह घुल जाय तो शीशी में भरा सोल्युशन नम्बर 1 लगाकर भी मिला दिया जाता है- फिर इसे बालों पर लगाकर लगभग 1 घंटे तक लगा रहने दिया जाता है । इसके पश्चात् बालों को साबुन से अच्छी तरह धो लिया जाता है ।

नोट:

1. इस खिजाब को लगाने से पहले भी बालों को साबुन या शैम्पू से अच्छी तरह धो कर सुखा लेना चाहिए ।

2. पैरा के कुछ विशैले होने के कारण इसकी जगह (Para Toluene Diamine) या ‘पैरा के मियिल, इथायल अथवा डाइ-मिथायल कम्पाउंड्‌स भी प्रयोग में लाये जाते हैं जो कुछ कम विषैले होते हैं ।

3. (Amidol) भी बालों को रगने के काम में आते हैं और इसके प्रयोग से कोई हानि भी नहीं पहुंचती-यह त्वचा पर दाग नहीं डालता और इससे एक ही सोल्युशन का खिजाब बनाया जा सकता है ।

इस फार्मूला से तैयार होने वाला खिजाब ब्रुश बालों पर लगाया जाता है- जब ठीक रंग चढ जाता है तो बाली को सुखाकर साबुन से धो लिया जाता है ।

अन्य उपयोगी संकेत (Other Useful Signals):

 

1. समस्त प्रकार के खिजाबों में Para वाले खिजाब बढ़िया माने गये हैं, परन्तु ये कुछ व्यक्तियों की त्वचा को हानि पहुंचाते हैं । यद्यपि ऐसी त्वचा वाले व्यक्ति बहुत कम होते हैं । इन लोगों को एक प्रकार का त्वचा का रोग हो जाता है । इस प्रकार की अनुभूति वाले व्यक्तियों को सम्भवत: पिछले वर्ष तक हानि न पहुंचाती हो, परन्तु बाद के वर्षों में हानि पहुंच सकती है ।

अतः इस हानि की सम्भावना का पता लगाने के लिए खिजाब लगाने से पहले त्वचा पर इसके प्रभाव की परीक्षा कर लेनी चाहिए । यदि किसी व्यक्ति को ये खिजाब अनुकूल नहीं पड़ते तो उसे खिजाब लगाने के बाद त्वचा रोग लक्षण दिखाई पड़ेंगे ।

खोपड़ी की त्वचा में जलन होगी और चेहरे की त्वचा लाल हो जायेगी तथा वहां भी जलन होगी. पलक सूज पायेंगी इत्यादि । वैसे भारत में इतनी नाजुक त्वचा वाले व्यक्ति कम है । इस खिजाब को प्रयोग में लाते समय इस बात की भी सावधानी रखनी चाहिए कि यह आंख में न पड़ने आये । क्योंकि आंखों के लिए यह बहुत हानिप्रद है ।

खिजाब की परीक्षण विधि (Patch Test Method):

जो खिजाब काम में लाना हो, पहले उसका परीक्षण कर लेना चाहिए और जब उससे होने को कोई सम्भावना न हो तो काम में लाना चाहिए । इस परीक्षण का तरीका निम्न है- थोड़े से खिजाब को अच्छी तरह तैयार कर लेना चाहिए ।

जैसा कि उसके साथ बालों का रगने का तरीका बताया गया हो उसके अनुसार पहले इसे कान के नीचे लगाना चाहिए और फिर गर्दन के तरफ लगभग 2-5 सैंटीमीटर (1 इंच दूरी) तक लगाना चाहिए इस प्रकार इसे एक ही जगह लगभग 24 घंटे तक लगा रहने दिया जाता है ।

यदि यह जगह लाल हो जाय अथवा जलन या खुजली प्रतीत हो तो इसका मतलब यह हुआ कि ऐसे व्यक्तियों के लिये एक खिजाब हानिपद्र होगा अतः ऐसे व्यक्तियों को पैरा वाला खिजाब नहीं लगाना चाहिए । इसके अतिरिक्त जिनके सिर में जख्म हो या त्वचा में पहले से कोई विकार हो तो उन्हें कोई ऐसा खिजाब काम में नहीं लाना चाहिए ।

अन्य चुने हुए फार्मूले (Other Selected Formulas):

विभिन्न प्रकार के खिजाबों के कुछ फार्मूले और उनसे तैयार होने वाले खिजाबों के प्रयोग व परीक्षण विधियां ऊपर दी जा चुकी है । अब कुछ अन्य चुने हुए फार्मूलों यहाँ दिए जा रहे हैं ।

 

मशीनरी एवं उपकरण (Machinery and Equipment):

1. मिक्सिंग टैंक, स्टेनलेस स्टील का बना हुआ

2. स्टोरेज टैंक

हेयर फिक्सर (बालों को बिठाने के लिए) को उत्पादन  करना (Manufacturing of Hair Fixer):

सामान्यतः इसे सिक्ख लोग अपनी दाढ़ी-मूछें संतावरे के लिए प्रयोग में लाते हैं । इसे बालों में लगाकर उन्हें एक बार संवार लेने पर, घंटों तक वे उसी तरह संवरे रहते हैं ।

निर्माण विधि (Construction Method):

गोंद को (अर्थात कम ट्रागाकन्थ को) लगभग दो-तीन घटे तक डिस्टिल्ड वाटर में भीगा रहने दिया जाता है, ताकि यह अच्छी तरह फूल जाये । फिर किसी मथानी या एमल्सीयर की सहायता से अच्छी तरह हिला-चलाकर गोंद का एमल्शन-सा बना लिया जाता है ।

इसके पश्चात् इसमें संरक्षक पदार्थ के रूप में मिथयल पैरा हाइड्रॉक्सी बैंजोट तथा सुगन्ध के रूप में रोज वाटर परफ्यूम या कोई और अन्य उपयुक्त सुगन्ध मिला दिया जाता है । यदि रंगीन बनाना चाहें तो कोई हानिरहित ‘कास्मैटिक कलर’ भी लगभग 1 प्रतिशत मात्रा में मिला दिया जाता है ।

मशीन एवं उपकरण (Machines & Equipment):

1. मिक्सिंग टैंक, स्टेनलेस स्टील का बना हुआ, क्षमता 200 लीटर, एजिटेटर के साथ

2. स्टोरेज टैंक