Read this article in Hindi to learn about:- 1. फाइल के पार्ट्स (Parts of File) 2. फाइल का वर्गीकरण (Classification of File) 3. विधियां (Techniques) 4. आपरेशन (Operation) 5. मूवमेंट (Movement) 6. सावधानियां (Precautions).

फाइल के पार्ट्स (Parts of File):

फाइल प्रायः हाई कार्बन स्टील, कास्ट स्टील या अच्छे ग्रेड की टूल स्टील से बनाई जाती है । इसकी पूरी बॉडी को हार्ड व टेम्पर कर दिया जाता है और टैंग को मुलायम रखा जाता है जिससे हैंडल फिट करते समय लूंगा टूटने नहीं पाती है ।

फाइल के मुख्यतः निम्नलिखित पार्ट्स होते हैं:

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i. प्वाइंट

ii. फेस

iii. ऐज

iv. शोल्डर

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v. हील

vi. टैंग

फाइल का वर्गीकरण (Classification of File):

फाइल का वर्गीकरण निम्नलिखित के अनुसार किया जाता है:

I. लंबाई

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II. आकार

III. ग्रेड

IV. कट

I. लंबाई:

फाइल का साइज या लंबाई उसकी हील से प्वाइंट के बीच की दूरी से लिया जाता है । लंबाई में 100 से 200 मिमी. तक फाइन कार्यों के लिए और 200 से 450 मिमी. तक बड़े कार्यों के लिये फाइलें प्रयोग में लाई जाती हैं ।

II. आकार:

आकार के अनुसार निम्नलिखित प्रकार की फाइलें प्रयोग में लाई जाती हैं:

(i) फ्लैट फाइल:

इस फाइल का क्रॉस सेक्शन आयताकार होता है जिसका आगे का लगभग 1/3 भाग टेपर और पीछे का लगभग 2/3 भाग समानान्तर होता है इसके दोनों फेसों पर प्रायः डबल कट और दोनों एजेस् पर सिंगल कट दांते कटे होते हैं । इस फाइल का अधिकतर प्रयोग साधारण कार्यों के लिये किया जाता है । इसका मुख्य प्रयोग फ्लैट सरफेस बनाने के लिये किया जाता है ।

(ii) हाफ राउंड फाइल:

इस फाइल का क्रॉस सेक्शन अर्ध गोलाकार होता है जिसका नीचे का भाग चपटा और ऊपर का भाग अर्धगोल होता है । इसके चपटे फेस पर प्रायः डबल कट दांते और अर्ध गोल फेस पर सिंगल कट दांते कटे होते हैं । इस फाइल का अधिकतर प्रयोग किसी सुराख को बढ़ाने के लिये, नतोदर सरफेस पर फाइल लगाने के लिए किया जाता है । इसका प्रयोग फ्लैट सरफेस पर भी किया जाता है ।

(iii) राउंड फाइल:

इस फाइल का क्रॉस सेक्शन गोलाकार होता है । इस फाइल की बॉडी पर प्रायः सिंगल कट दांते कटे होते हैं । इस फाइल का मुख्य प्रयोग गोल सुराखों को बढ़ाने के लिए और नतोदर सरफेस पर किया जाता है ।

(iv) स्क्वायर फाइल:

इस फाइल का क्रास सेवन वर्गाकार होता है । इसके सभी चारों फेसों पर प्रायः डबल कट दांते कटे होते हैं । इस फाइल का मुख्य प्रयोग वर्गाकार या आयाताकार सुराखों को बनाने के लिए किया जाता है । इसका प्रयोग चाबीघाट

आयताकार नालियों और गियर के दांतों को फाइल लगाने के लिए भी किया जाता है ।

(v) ट्रैंगुलर फाइल:

इस फाइल को थी स्क्वायर फाइल भी कहते हैं । इसका क्रॉस सेक्शन त्रिकोण होता है और प्रत्येक भुजा 60 के कोण में बनी होती है । इस फाइल के सभी तीन फेसों पर प्रायः डबल कट दांते होते हैं । इस फाइल का अधिकतर प्रयोग ‘V’ आकार के ग्रूव बनाने के लिए वर्गाकार, आयताकार, त्रिभुजाकार स्लॉट और सुराख बनाने के लिये किया जाता है ।

(vi) हैंड फाइल:

इस फाइल की फाइल के दोनों छोर चौड़ाई में एक दूसरे के समानान्तर होते हैं और इसके एक छोर पर दांते नहीं कटे होते हैं । इसलिये इस फाइल को सेफ ऐज फाइल भी कहते हैं । इस फाइल का प्रयोग करते समय जॉब पर बनी 90 वाली संलग्न भुजा खराब नहीं होने पाती है ।

इस फाइल का अधिकतर प्रयोग वर्गाकार या आयताकार सुराख बनाने के लिए किया जाता है । इसके द्वारा समकोण में बने स्टेप और शोल्डर को भी बनाया जाता है ।

(vii) नाइफ ऐज फाइल:

इस प्रकार की फाइल का आकार चाकू जैसा होता है । यह फाइल क्रमशः चौड़ाई और मोटाई में टेपर होती है । इसका अधिकतर प्रयोग वहां पर किया जाता है जहां पर 30 से कम कोण में जॉब को बनाने के लिए फाइल करने की आवश्यकता पड़ती है । इसका प्रयोग ग्रूव व स्लॉट के कोनों को साफ करने के लिये भी किया जाता है ।

III. ग्रेड:

फाइल के फेस पर प्रति सेंटीमीटर में कटे हुए दांतों की संख्या को फाइल का ग्रेड कहते हैं । भिन्न-भिन्न लंबाई की फाइलों पर दांतों की संख्या भी अलग-अलग होती है । ज्यों-ज्यों प्रति से.मी. दांतों की संख्या बढ़ती जाती है दांते बारीक होती जाती हैं । इस प्रकार बारीक दांतों वाली फाइल कम धातु काटने के लिए प्रयोग में लाई जाती है ।

ग्रेड के अनुसार प्रायः निम्नलिखित फाइलें प्रयोग में लाई जाती हैं:

i. रफ फाइल:

इस ग्रेड की 100 से 450 मि.मी. लंबी फाइल में दांतों की संख्या 4.5 से 10 प्रति से.मी. होती है । इस ग्रेड वाली फाइल का प्रायः वहां पर प्रयोग में लाते हैं जहां पर मुलायम ओर अधिक धातु काटनी होती है ।

ii. बास्टर्ड फाइल:

इस ग्रेड की 100 से 450 मि. मी. लंबी फाइल में दांतों की संख्या 6 से 18 प्रति से .मी. होती है । इस ग्रेड वाली फाइल का प्रयोग प्रायः वहां पर किया जाता है जहां पर जॉब पर अधिक फिनिशिंग की आवश्यकता न हो और शुरू में अधिक धातु काटनी होती है ।

iii. सेकंड कट फाइल:

इस ग्रेड की 100 से 450 मि.मी. लंबी फाइल में दांतों की संख्या 11 से 21 प्रति से.मी होती है । इस ग्रेड की फाइल का अधिकतर प्रयोग फिटिंग शॉप में किया जाता है जहां पर जॉब की साधारण फिटिंग करनी हो और उसे फिनिश भी करना होता है ।

iv. स्मूथ फाइल:

इस ग्रेड की 100 से 450 मि.मी. लंबी फाइल में दांतों की संख्या 15 से 30 प्रति से.मी होती है । इस ग्रेड वाली फाइल का अधिकतर प्रयोग जॉब को सेंकड कट फाइल की अपेक्षा अधिक फिनिश करने की आवश्यकता होती है ।

v. डैड स्मूथ फाइल:

इस ग्रेड की 100 से 300 मि.मी. लंबी फाइल में दांतों की संख्या 28 से 35 प्रति से.मी. होती है इस ग्रेड की फाइल का अधिकतर प्रयोग फाइन फिनिशिंग के लिये किया जाता है ।

vi. सुपर स्मूथ फाइल:

इस ग्रेड की 100 से 250 मि.मी. लंबी फाइल में दांतों की संख्या 40 से 63 प्रति से.मी. होती है । इस ग्रेड की फाइल का अधिक प्रयोग जॉब बहुत अधिक शुद्धता

में फाइन फिनिसिंग के लिये किया जाता है ।

IV. कट:

कार्य के अनुसार फाइल पर भिन्न-भिन्न आकार के दांते काटे जाते हैं जिससे विभिन्न कार्य आसानी से किये जा सकते हैं ।

कट के अनुसार प्रायः निम्नलिखित फाइलें प्रयोग में लाई जाती हैं:

a. सिंगल कट फाइल:

फाइल इस प्रकार की फाइल में दांते फाइल के फेस पर एक ही सेट में एक-दूसरे के समानान्तर काटे जाते हैं । इसमें दाँते सेंटर लाइन से 600 के कोण में बने होते हैं । इस कट वाली फाइल का अधिकतर प्रयोग मुलायम धातुओं पर किया जाता है जैसे पीतल, तांबा, एल्युमीनियम इत्यादि । इसका प्रयोग फाइन फिनिशिंग के लिए भी किया जाता है ।

b. डबल कट फाइल:

इस प्रकार की फाइल में दाँते फाइल के फेस पर दो सेटों में कटे होते हैं जो कि एक-दूसरे को क्रॉस करके काटे जाते हैं । पहले सेट के दांते सेंटर लाइन से 60 के कोण में कटे होते हैं जिसे ओवर कट कहते हैं और दूसरे सेट के दाँते सेंटर लाइन से 75 से 80 के कोण के कटे होते हैं जो कि पहले सेट के दांतों को क्रॉस

करते हैं जिसे अपकट कहते हैं । इस कट वाली फाइल प्रायः साधारण कार्यों-लिये प्रयोग में लाई जाती है ।

c. रास्प कट फाइल:

इस प्रकार की फाइल के फेस पर दांते मोटे और उभरे हुए काटे जाते हैं । इस कट वाली फाइल का अधिकतर प्रयोग लकडी, फाइबर, सीसा इत्यादि पर किया जाता है ।

d. सर्क्यूलर कट फाइल:

इस प्रकार की फाइल के फेस पर दांते वक्र काट में कटे होते हैं । इस कट वाली फाइल बहुत कम धातु काटती है । इसका प्रयोग प्रायः मुलायम धातुओं पर फिनिशिंग के लिये किया जाता है । इस कट वाली फाइल को विक्सन या रिजिड फ्लैट फाइल भी कहते हैं ।

फाइलिंग विधियां (Filing Techniques):

i. स्ट्रेट फाइलिंग:

इस प्रकार की फाइलिंग को प्रायः वाइस के सामने खड़े होकर जॉब की सरफेस को समतल बनाने के लिये की जाती है । इस प्रकार की फाइलिंग प्रायः वहां पर की जाती है जहां पर सरफेस लंबी होती है ।

ii. क्रॉस फाइलिंग:

इस प्रकार की फाइलिंग को डायगनल फाइलिंग भी कहते हैं । इस विधि में प्रायः पहले वाइस के 45 दायें और फिर 45 बायें ओर खड़े होकर फाइल चलाई जाती है । इस प्रकार की फाइलिंग प्रायः वहां पर की जाती है जहां पर सरफेस चौड़ी होती है । इस प्रकार की फाइलिंग पतले-पतले कार्यों पर की जाती है जिससे कंपन कम होती है ।

iii. ड्रॉ फाइलिंग:

इस प्रकार की फाइलिंग में फाइल को दोनों ओर से दोनों हाथों से पकड़कर तथा वाइस के सामने खडे होकर जॉब पर आगे-पीछे चलाते हैं । इस विधि से बहुत कम धातु रगड़ी जा सकती है । इसलिये इस विधि का अधिकतर प्रयोग जॉब पर फिनिशिंग और पालिशिंग के लिये किया जाता है ।

iv. कर्व फाइलिंग:

इस प्रकार की फाइलिंग प्रायः वहां पर की जाती हे जहां पर किसी गोल आकार के जॉब को फाइल के द्वारा बनाना होता है । इस विधि से फाइल चलाते समय फाइल का आगे वाला और पीछे वाला भाग बारी-बारी से ऊपर-नीचे किया जाता है जिससे फाइल गोलाई में चलती है और सरफेस गोल बन जाती है ।

फाइलिंग आपरेशन (Filing Operation):

जिस क्रिया से धातु को फाइल के द्वारा काटा जाता है उसे फाइलिंग कहते हैं ।

फाइलिंग करते समय निम्नलिखित क्रम को ध्यान में रखना चाहिये:

a. सबसे पहले कार्य के अनुसार फाइल का चयन कर लेना चाहिये । इसके बाद चैक कर लेना चाहिये कि फाइल पर हैंडल ठीक तरह से लगा है ।

b. जॉब को वाइस के बीच में अच्छी तरह से बांध लेना चाहिये । जॉब को वाइस जॉ से 3 से 10 मिमी. तक ऊंचा रखना चाहिये । इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिये कि वाइस की ऊंचाई कारीगर की लंबाई के अनुसार होनी चाहिये ।

c. फाइल के हैंडल को हथेली का सहारा देकर पकड़ना चाहिये ।

d. वाइस के सामने खड़े होकर कार्य आरंभ करना चाहिये । खड़े होते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि दोनों पैरों की बीच में 200 से 300 मिमी. तक की दूरी होनी चाहिये जिससे कारीगर सुविधाजनक खड़ा हो सकता है ।

e. कार्यक्रिया शुरू करने के लिये फाइल को जॉब पर एक सिरे पर रखकर शुरू करनी चाहिये और फाइल चलाते हुए दूसरे सिरे तक ले जानी चाहिये जिससे सरफेस एक जैसी समतल बनेगी ।

f. फाइल पर दबाव व ताकत केवल फारवर्ड स्ट्राक में ही लगानी चाहिये और प्रति मिनट स्टाकों की औसतन संख्या 40 से 60 होनी चाहिये ।

g. जब सरफेस बन जाये तो उसकी फ्लैटनैस ट्राई स्थ्यायर के ब्लेड से चैक कर लेनी चाहिये ।

h. फाइल की हुई सरफेस को हाथ से पोंछना नहीं चाहिये जिससे फाइल चलाते समय वह फिसलने लगेगी ।

i. फाइलिंग करते समय जहां तक संभव हो फाइल की पूरी लंबाई को प्रयोग में लाना चाहिये ।

j. फाइलिंग करने के बाद जॉब व फाइल को अच्छी तरह से साफ करके उनके निजी स्थान पर रखना चाहिए ।

फाइल का मूवमेंट (Movement of File):

फाइलिंग करते समय निम्नलिखित को ध्यान में रखना चाहिए:

1. फाइलिंग करते समय कटिंग मूवमेंट हमेशा फाइल के लांजिट्‌यूडिनल अक्ष की दिशा में होना चाहिए जिससे फाइलिंग करते समय ग्रूब्स नहीं बन पाते । यदि फाइलिंग करने वाली सरफेस फाइल की चौड़ाई से अधिक होती है तो एडवांस्त मूवमेंट की आवश्यकता होती है जो बायीं ओर या दायीं ओर दी जा सकती है, परन्तु इसे बैकवर्ड मूवमेंट के दोहरान ही देना चाहिए ।

2. फ्लैट फाइलिंग करते समय फाइल का मूवमेंट कट की दिशा में होना चाहिए । जहां तक सम्भव हो चिप्स सम्पूर्ण सरफेस पर एक समान निकलने चाहिए । जिसे फाइल के प्रत्येक स्ट्रोक के यूनिफार्म विभाजन के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है ।

फाइल के उपयोग में सावधानियां (Precautions Taken while Using File):

i. बिना हैंडल की फाइल का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिये ।

ii. प्रायः सही ग्रेड, आकार और साइज की फाइल का प्रयोग करना चाहिये ।

iii. फाइल का प्रयोग करते समय जहां तक हो सके उसकी पूरी लंबाई को प्रयोग में लाना चाहिये ।

iv. फाइल के फेस पर कभी भी तेल या ग्रीस नहीं लगानी चाहिये ।

v. फाइल के दांतों में यदि धातु के छोटे-छोटे कण फंस जायें तो उन्हें फाइल कार्ड के द्वारा साफ कर लेना चाहिये ।

vi. नई फाइल का प्रयोग करने से पहले उसे मुलायम धातु जैसे पीतल, तांबा इत्यादि पर रगड़ लेना चाहिये ।

vii. टूटे हुए हैंडल वाली फाइल का प्रयोग नहीं करना चाहिये ।

viii. कास्ट ऑयरन की फाइलिंग करने से पहले चीजल या फाइल के प्वाइंट से उसकी स्केल को समाप्त कर लेना चाहिये ।

ix. फाइलों को कभी भी आपस में मिलाकर नहीं रखना चाहिये बल्कि उन्हें अलग- अलग रखना चाहिये ।

x. फाइलों को कभी भी आपस में नहीं लड़ना चाहिये ।

xi. फाइल पर कभी भी हथौड़ी से चोट नहीं लगानी चाहिये ।

xii. फाइलों को कभी भी गर्म नहीं करना चाहिए ।

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