Read this article in Hindi to learn about seven major effects of temperature on the earth. The effects are: 1. अक्षांश (Latitude) 2. ऊँचाई (Altitude) 3. मेघ आवरण (Cloud Cover) 4. सागर से दूरी (Continentally) 5. पवन (Wind) 6. धरातल की प्रकृति तथा ढ़ाल (Topography and Slope) 7. महासागरीय जलधाराएं (Ocean Currents).

पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 15°C हैं, परन्तु स्थानीय औसत तापमान में भारी भिन्नता पाई जाती है । मानचित्रों पर तापमान क्षैतिज वितरण सामान्यतः समताप रेखाओं के द्वारा दिखाया जाता है क्षैतिज तापमान के वितरण पर निम्नलिखित प्रभाव पडता है:

Effect # 1. अक्षांश (Latitude):

किसी स्थान की अक्षांशीय स्थित का सूर्यताप की प्राप्ति पर एक गहरा प्रभाव डलता है । दूसरे शब्दों में विषुवत रेखीय प्रदेशों में ऊँचा तापमान रिकॉर्ड किया जाता है जबकि ध्रुवीय प्रदेशों में तापमान नीचे रहता हैं ।

Effect # 2. ऊँचाई (Altitude):

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क्षोभमण्डल में ऊँचाई की ओर जाते हुये तापमान में 6-4°C प्रति किलोमीटर की दर से कमी होती जाती है, इसीलिये किसी भी अक्षांश पर सागरीय स्तर (Sea-Level) पर तापमान सब से अधिक रिकॉर्ड किया जाता है । यही कारण है कि विषुवत रेखा के निकट स्थित लिब्रेविली (गैबोन) सागर स्तर से केवल 15 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है वहाँ का औसत तापमान 28°C रहता है, जबकि कबूदी (इक्वेडोर) जो विषुवत रेखा के निकट 3000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, का वार्षिक औसत तापमान 13°C रहता है ।

Effect # 3. मेघ आवरण (Cloud Cover):

तापक्रम के वितरण पर बादलों का प्रभाव भी भारी पड़ता है । एक अनुमान के अनुसार किसी भी समय आकाश का 50 प्रतिशत भाग हमेशा बादलों से ढका रहता है । सामान्यत: यदि दिन के समय बादल हो तो तापमान कम रहता है परन्तु यदि रात के समय बादल हो तो रात का तापमान बढ़ जाता है ।

यही कारण है कि विषुवत रेखा पर जहाँ सूर्य की किरणें लम्बवत पड़ती है सबसे ऊँचे तापमान रिकॉर्ड नहीं होते, इसके विपरीत कर्क रेखा पर हर एक महाद्वीप के पश्चिमी भाग पर स्थित मरुस्थलों में जहाँ बादल कम रहते हैं । विश्व के सबसे अधिक तापमान रिकॉर्ड किये जाते हैं । लीबिया में अल-अजीजया तथा केलिफोर्निया में डेथ-वैली (Death Valley) एवं राजस्थान में गंगानगर तथा जोधपुर मे उच्च तापमान दर्ज किये जाते हैं ।

Effect # 4. सागर से दूरी (Continentally):

किसी स्थान का सागर के निकट या दूर होने का भी तापमान पर प्रभाव पड़ता है । जो स्थान सागर तट के निकट होते हैं, उनका वार्षिक तापान्तर कम रहता है । इसके विपरीत जो स्थान तट से अधिक दूरी पर स्थित हैं उनका वार्षिक तापान्तर अधिक रहता है । उदाहरण के लिये कन्याकुमारी का वार्षिक तापान्तर केवल 3°C और दिल्ली का वार्षिक तापान्तर 15°C से अधिक रहता । इसका मुख्य कारण जल एवं थल का प्रभाव है । जल देर में गर्म होता है और देर ही में ठंडा जबकि थल जल्द गर्म होता है और जल्द ही ठंडा होता है ।

Effect # 5. पवन (Wind):

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तापमान के क्षैतिज वितरण पर पवन के वेग तथा दिशा का भी प्रभाव पड़ता है । सागर से आने वाली पवन तापमान को कम करने में सहायक होती है जबकि थल के ऊष्मा भागों से आने वाली पवन तापमान में वृद्धि करती है ।

Effect # 6. धरातल की प्रकृति तथा ढ़ाल (Topography and Slope):

तापमान के वितरण पर भू-आकृति तथा ढाल का भी प्रभाव पड़ता है । पर्वत का जो पक्ष सूर्य के सामने अधिक रहता है उस पर अधिक तापमान और जो विपरीत ढाल होता है उस पर तापमान कम रिकॉर्ड किया जाता है । चट्‌टानों का रंग तथा उनकी भौतिक एवं रसायनिक विशेषतायें भी तापमान को प्रभावित करती हैं । उदाहरण के लिये काले रंग की बसाल चट्‌टानों में अधिक तापमान रिकॉर्ड किया जाता है जबकि सफेद रंग के संगमरमर क्षेत्र में तापमान तुलनात्मक रूप से कम रहता है ।

Effect # 7. महासागरीय जलधाराएं (Ocean Currents):

महासागरों में बहते पानी को जलधारा कहते हैं । जलधाराएं गर्म पानी को ठंडे प्रदेशों की ओर तथा ठंडे जल को गर्म प्रदेशों की ओर ले जाती हैं । इस प्रकार जल के तापमान का प्रभाव निकटवर्ती प्रदेशों पर पड़ता है ।

खाड़ी की धारा (Gulf Stream) का गर्म पानी 60° उत्तर में स्थित नॉर्वे के बन्दरगाहों को शीतकाल में खुले रखने में सहायक रहता है, जबकि लेब्रेडोर ठंडे पानी (Labrador Current) की जलधारा कनाडा के 50° उत्तर तक बन्दरगाहों को शीत काल में जमा देती है और जल परिवहन का कार्य और जहाजों का आना जाना बन्द हो जाता है ।

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