महाद्वीपों का जियोमोर्फोलॉजी | Geomorphology of Continents in Hindi!

सभी महाद्वीपों में शील्ड (Shield), पर्वत, पठार, मैदान तथा ज्वालामुखी पाये जाते हैं । इन भू-आकृतियों का संक्षिप्त वर्णन नीचे दिया गया है ।

महाद्वीपीय शील्ड (Continental Shield):

महाद्वीपों की शील्ड पूर्व-कैम्ब्रियन युग (Pre-Cambrian) से पहले की बनी हुई हैं, अर्थात यह 57 करोड़ वर्ष से अधिक पुरानी है । इनमें से कनाडा की शील्ड सबसे पुरानी मानी जाती है जिसकी आयु तीन अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी है । आजकल यह धरातल के समतल पाई जाती है ।

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पर्वत (Mountains):

महाद्वीपीय-शील्ड के किनारों पर सामान्यत: वलनदार पर्वत पाये जाते हैं । ये पर्वत एक शृंखला के रूप में हो सकते हैं और कहीं-कहीं एक अकेले शिखर के रूप में । हिमालय पर्वत विश्व की एक महत्वपूर्ण वलनदार पर्वतमाला है, जिसका सबसे ऊँचा पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट 8848 मीटर ऊँचा है ।

पर्वतों को आकार के आधार पर निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

(क) वलनदार,

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(ख) ज्वालामुखी,

(ग) फॉल्ट-ब्लॉक तथा;

(घ) गुम्बदाकार  ।

पठार (Plateau):

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पठारों का ऊपरी तल, समतल होता है तथा उसके किनारों का ढाल तीव्र होता है । चीन में स्थित तिब्बत का पठार विश्व के बड़े पठारों में से एक है ।

 

मैदान (Plain):

ऐसे विस्तृत भू-भाग, जिनका ढलान बहुत मन्द होता है मैदान कहलाते हैं । उत्तरी भारत का मैदान, उत्तरी चीन का मैदान तथा मिसीसिपी, मिसौ के मैदान बड़े मैदानों में से एक हैं ।

ऊँचाई (Elevation):

सागर स्तर से किसी स्थान की को कहते हैं ।

रिलीफ (Relief):

किसी स्थान पर सबसे ऊँचे तथा सबसे निचले स्थान के अन्तर को भू-आकृति अथवा रिलीफ कहते हैं ।

बेसिन (Basin):

ऐसे निचले भाग, जिसके चारों ओर ऊँचाई हो तथा उन ऊंचाइयों से पानी का बहाव बेसिन की ओर होता है ।

ज्वालामुखी (Volcanoes):

 

ऐसा प्रकृतिक पाइप जो भूपटल के नीचे के लावा को धरातल की सतह से जोड़ता है, ज्वालामुखी कहलाता है । इस पाइप के द्वारा पृथ्वी के अन्दर का लावा भाप इत्यादि धरातल पर आता है ।

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