वैज्ञानिक प्रबंधन के चौदह सिद्धांत | Read this article in Hindi to learn about the fourteen principles of scientific management. The principles are:- 1. कार्य विभाजन (Division of Work) 2. सत्ता एवं उत्तरदायित्व (Authority and Accountability) 3. अनुशासन (Discipline) 4. आदेश की एकता (Unity of Command) and a Few Others.

फेयोल ने प्रशासन या प्रबंध संबंधी 14 सिद्धांतों का निरूपण अपनी पुस्तक ”जनरल एण्ड इण्डस्ट्रीयल मैनेजमेण्ट” में किया था, जो इस प्रकार है:

Principle # 1. कार्य विभाजन (Division of Work):

फेयोल के अनुसार सभी प्रबंधकीय या तकनीकी कार्यों में यह सिद्धांत समान रूप से लागू किया जा सकता है ।

फेयोल ने इसके 4 विशेष लाभ बताये है:

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(a) विशिष्टकरण की प्राप्ति

(b) मानवीय और भौतिक संसाधनों की कार्यकुशलता में वृद्धि

(c) नियोजन समन्वय और नियंत्रण की समस्या से निपटने में सहयोगी

(d) कार्यों के मानक स्तर तय करने में उपयुक्त ।

Principle # 2. सत्ता एवं उत्तरदायित्व (Authority and Accountability):

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इस संबंध में फेयोल ने तीन बातों पर बल दिया:

(a) सत्ता और दायित्व में घनिष्ट संबंध होता है ।

(b) प्रत्येक कार्मिक की सत्ता और दायित्वों की स्पष्ट व्याख्या होनी चाहिए ।

(c) सत्ता और उत्तरदायित्व में समानता होनी चाहिए ।

Principle # 3. अनुशासन (Discipline):

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फेयोल ने इसे महत्वपूर्ण सिद्धांत माना है । अनुशासन में आज्ञापालन, शक्ति के प्रति आदर और वफादारी सम्मिलित है ।

फेयोल ने इस संबंध में निम्नलिखित पर बल दिया है:

(a) अनुशासन प्राप्त करने का दायित्व प्रबंधक का है ।

(b) प्रबंधक का व्यक्तित्व अनुशासन प्राप्त करने का पैमाना होता है ।

(c) प्रत्येक स्तर पर प्रभावी पर्यवेक्षण हो ।

(d) नियोजन कार्मिक के मध्य अनुबंध उचित हो और वह स्पष्ट भाषा में हो तथा सभी उसका पालन करें ।

(c) अनुशासन भंग होने पर दण्ड विधान की समुचित और विवेकपूर्ण व्यवस्था हो ।

Principle # 4. आदेश की एकता (Unity of Command):

फेयोल इस सिद्धांत के मूल और प्रथम प्रतिपादक है । इस सिद्धांत के अनुसार, ”कार्य के सही संपादन के लिये आवश्यक है कि एक कार्मिक को एक समय पर एक ही अधिकारी से आदर्श मिले ।” अर्थात् टेलर के विशेषज्ञ पर्यवेक्षण के विपरित फेयोल सामान्य पर्यवेक्षण का समर्थक है ।

Principle # 5. निर्देश की एकता (Unity of Instruction):

इससे आशय है संगठन का संचालन एक ही योजना क तहत हो । आदेश की एकता का संबंध कार्मिकों से है जबकि निर्देश की एकता का संबंध संपूर्ण संगठन से है । पहले में कार्मिक को एक ही अधिकारी से आदेश मिलता है, दूसरे मैं संगठन के सभी पक्षों को एक ही योजना से निर्देश मिलते है ।

फेयोल के अनुसार सभी कार्यों, प्रयासों में समन्वय के लिये आवश्यक है कि उनको एक ही योजना के अनुरूप निर्देशित किया जाए । फैयोल के शब्दों में- ”दो सिर वाला शरीर चाहे पशु का हो या मानव का, सर्वत्र ही राक्षस माना जाता है, जिसको जीवित रहने में भी कठिनाई होती है । अत: संगठन रूपी शरीर पर एक ही सिर होना उचित है ।”

Principle # 6. व्यैक्तिक हितों की तुलना में सामान्य हितों को महत्व (Importance of General Interests in Comparison to Personal Interests):

फेयोल के अनुसार संस्थान की सफलता व्यैक्तिक और सामान्य हितों के मध्य उचित समन्वय या संतुलन पर निर्भर करती है । इसका दूसरा पहलू यह भी है कि संगठन के सामान्य उद्देश्यों को कार्मिकों के व्यैक्तिक हितों पर वरीयता दी जाना चाहिए, यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो तो ।

Principle # 7. वेतन आदि (Wages etc.):

फेयोल ने कार्मिकों को उनके कार्य के अनुपात में वेतन देन का सुझाव दिया जिसके अनुसार:

(a) समान कार्य के बदले समान वेतन दिया जाए ।

(b) पारिश्रमिक के मामले में भेदभाव नहीं किया जाए ।

(c) पारिश्रमिक की मात्रा इतनी हो जो कार्मिक को संतुष्ट रख सके ।

(d) कार्मिक को प्रोत्साहित ‘करने के लिये आर्थिक के साथ गैर-आर्थिक प्रोत्साहन भी दिये जाने चाहिए ।

फेयोल के अनुसार कार्मिकों को 6 प्रकार से पारिश्रमिक दिया जा सकता है:

(i) समय आधारित,

(ii) कार्य दर अनुसार,

(iii) वस्तु दर भुगतान,

(iv) बोनस,

(v) लाभांश में से हिस्सा और

(vi) गैर वित्तीय पुरस्कार ।

Principle # 8. केन्द्रीकरण बनाम विकेन्द्रीकरण (Centralization versus Decentralization):

फेयोल का मत है कि किसी संगठन में केन्द्रीकरण या विकेन्द्रीकरण का चुनाव करते समय संगठन के आकार, उसकी प्रकृति और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिये । उसने छोटे संगठनों में केन्द्रीकरण का समर्थन किया लेकिन बड़े संगठनों में केन्द्रीकरण का तभी समर्थन किया जब ऐसा संगठन, कार्य और कार्मिक सभी दृष्टि से उपयुक्त हो ।

Principle # 9. श्रेणीबद्ध शृंखला (Hierarchical Series):

फेयोल ने पदसोपान को अनिवार्य सिद्धांत माना यद्यपि उसे ”स्केलर चेन” की संज्ञा दी । उसके अनुसार संगठन वस्तुत: उच्च अधीनस्थों के मध्य श्रेणीबद्ध संबंधों की व्यवस्था है । इसमें संचार के विभिन्न स्तर निर्मित होते है जिनका पालन व्यवस्था के लिये जरूरी है यद्यपि जरूरत पड़ने पर इन स्तरों को लांघा जा सकता है । लम्बसमस्तरीय और समस्तरीय दोनों स्तरों को लांघने के लिये फेयोल ने “गेंगप्लाक” (पुल अवधारणा) का रास्ता सुझाया ।

Principle # 10. व्यवस्था (Arrangement):

सही व्यक्ति को सही कार्य के सिद्धांत को उसने “व्यवस्था” का नाम दिया । फेयाल का मत था कि जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति या वस्तु के लिये एक निश्चित स्थान होता है उसी प्रकार प्रत्येक स्थान या पद के लिये उचित व्यक्ति या वस्तु होती है । पद के अनुरूप योग्याताधारी की नियुक्ति की जानी चाहिये ।

Principle # 11. समता (Parity):

नियोक्ता और कार्मिक के संबंध परस्पर विश्वास पर निर्भर होने चाहिये । इसके लिये दोनों को प्रयास करने की जरूरत है । नियोक्ता यदि न्यायपूर्ण और समानता का व्यवहार करेंगे तो कार्मिक भी कार्य और उनके प्रति समर्पित रहेंगे ।

Principle # 12. स्थिर कार्यकाल (Stable Tenure):

फेयोल कार्मिकों को कार्यकाल की सुरक्षा की ग्यारंटी देने के पक्ष में है ताकि वे पूर्ण समर्पण के साथ काम कर सके और तभी उच्च उत्पादकता पूर्ण प्राप्त हो सकती है ।

Principle # 13. पहल (Initiative):

प्रत्येक कार्मिक में विचार करने कुछ नया सुझाने आदि की क्षमता होती है । प्रबंधकों को इस क्षमता को प्रोत्साहित करना चाहिये । इससे संगठन का मनोबल ऊँचा होता है तथा उसमें प्रगतिशीलता आती है ।

Principle # 14. स्प्रीट डी कापर्स (संगठनात्मक लगाव की भावना) (Espirite de Corpus):

फेयोल के अनुसार प्रबंधकों को फूट डालो, राज करों की आत्मज्ञाती नीति के स्थान पर सहयोग, संगठन, अपनत्व, भाईचारा, परस्पर प्रेम जैसी भावना का अवलंबन करना चाहियें । इससे संगठन में शक्ति का संचार होता है । कार्मिक संगठन को अपनी संस्था मानकर उसके प्रति समर्पित रहते है । इसे फेयोल ने फ्रेंच भाषा में ”स्प्रीन्ट डी कापर्स” की संज्ञा दी ।