ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस प्रभाव पर अनुच्छेद | Paragraph on Global Warming and Green House Effect!

मानव के द्वारा बहुत-सी हानिकारक ग्रीन हाऊस गैसों का उत्सर्जन किया जा रहा है । ग्रीन हाउस गैसें सूर्य से आने वाली ऊष्मा को धरती पर तो आने देती हैं, परंतु ऊष्मा को वापस वायुमंडल में भेजने में बाधक होती हैं अर्थात् विकिरण की प्रक्रिया में रुकावट आती है, जिसके कारण भूमंडल के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है ।

इस प्रकार पृथ्वी पर ग्रीन हाउस प्रभाव प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से विदित हो रहा है । जल-वाष्प एवं कार्बन-डाइ-ऑक्साइड सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण ग्रीन हाउस गैसे हैं । वायुमंडल में इन्हीं गैसों के कारण पृथ्वी का औसत तापमान 15°C के आस पास रहता है ।

इन गैसों को बिना पृथ्वी का तापमान लगभग 19°C रहता । इतने कम तापमान पर पृथ्वी पर जीवन असंभव हो जाता । इसलिये कहा जा सकता है कि पृथ्वी पर जैविक पदार्थ इन्हीं गैसों के कारण जीवित हैं ।

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1789 की औद्योगिक क्रांति के पश्चात् वायुमंडल में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की मात्रा में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो वैज्ञानिकों के लिये एक चिंता का विषय है ।

ग्रीन हाउस गैसें भविष्य में पृथ्वी पर क्या प्रभाव डालेंगी, कहना मुश्किल है, परंतु वर्तमान के अध्ययन से पता चलता है कि (CO2) के कारण पृथ्वी के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है ।

इस बढ़ते हुये तापमान का जैव-मंडल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है । इस संबंध में किये गये अध्ययन से पता चलता है कि 1960 से तापमान में वृद्धि हुई है जिसके कारण शीतोष्ण कटिबंध में बसंत ऋतु जल्द आरंभ होने लगी है और सर्दी का मौसम देर से आरंभ होता है ।

बढ़ती हुई कार्बन-डाइ-ऑक्साइड (CO2) के कारण पेड़-पौधों की उत्पत्ति में वृद्धि हुई है । संयुक्त राज्य अमेरिका के अलास्का, केनेडा नार्वे, स्वीडेन, फिनलैंड, साइबेरिया, उत्तरी-चीन तथा मंगोलिया के उत्तरी भागों में वनस्पति की मात्रा में वृद्धि हो रही है ।

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हिमनद (Glaciers) विशेषज्ञों के अनुसार ध्रुवी क्षेत्रों में लगभग 10 प्रतिशत हिम की मात्रा में कमी आई है, परंतु वायुमंडल में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की वृद्धि से प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में वृद्धि हो रही है ।

यदि तापमान में वृद्धि होती रही तथा वर्षा की मात्रा में कमी हो गई तो इसका जैव-मंडल पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है । ऐसी परिस्थिति में वनस्पति वृद्धि में कमी आ सकती है । पारिस्थितिकी विज्ञान में विशेषज्ञों के अनुसार पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होने से बहुत-से जीव-जंतु तथा पशु-पक्षी उत्तर की ओर पलायन कर सकते हैं ।