मोटापा पर निबंध: मतलब और रोग | Essay on Obesity: Meaning and Diseases in Hindi!

Essay # 1. मोटापे का अर्थ (Meaning of Obesity):

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ चौका देने वाले आँकडे प्रस्तुत किए हैं- उनका आकलन है कि पूरे विश्व में करीब 3 करोड लोग मोटापे का शिकार हैं और साढे सात करोड़ से ज्यादा लोग अधिक वजन वाले हैं । मोटापे के बढते विस्तार को देखते हुए शारीरिक वसा के असामान्य स्तर को निर्धारित करने वाले मानकों को पुन: परिभाषित करने की जरूरत महसूस की जा रही है । लगता है कि मोटापा ही नया मानक बन गया है ।

लेकिन मानकों में फेरबदल के बाद भी बहुत अधिक खाने को स्वस्थ क्रिया कभी नहीं माना जा सकता । अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा खा लेना, फेंकने की तुलना में कहीं अधिक हानिकारक है । हम जो फेंक देते हैं, कम से कम वह किसी को नुकसान तो नहीं पहुँचाता ।

अगली बार जब किसी शानदार रेस्त्रां में जाएँ और महसूस करें कि आपने वह सब खा लिया है जो खाना चाहते थे या जिसकी जरूरत थी, तो खुद को याद दिलाएँ कि अब शरीर पर और अधिक भार डालने की अपेक्षा अपने-आप को रोक लेना ही अच्छा है ।

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यह बात दिमाग में रखना चाहिए कि अधिक खाना भी, चाहे भोजन कितना ही बढिया क्यों न हो एक प्रकार के शरीर प्रदूषण का ही रूप हो सकता है । यदि लगातार अधिक खाते रहते हैं, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि अपने शरीर संग्रहण स्थान को अधिक वसा के रूप में बढा रहे हैं ।

अधिक वजन होना और मोटा होना, इन दोनों में बातों में फर्क है । अधिक वजन का साधारण अर्थ है कि मापने पर वजन अधिक आना । कुछ लोगों का अधिक वजन उनकी विशालकाय अस्थि संरचना या खिलाडी माँसपेशीय द्रव्यमान के कारण होता है, लेकिन जनसंख्या का एक बहुत बडा भाग आम तौर पर अपने शरीर के चारों ओर अतिरिक्त वसा का भार वहन कर रहा है । लेकिन मोटापा इससे एक कदम आगे है और इसमें शरीर में वसा का अनुपात असामान्य रूप से बढ जाता है ।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक वैज्ञानिक माप का उपयोग करते हैं, जिसे शरीर द्रव्यमान सूचकांक या बॉडी मास इंडेक्स कहते हैं । इससे यह पता चलता है कि वजन स्वस्थ अनुपात में है या नहीं ।

बीएमआई चार आसान चरणों में वर्णन किया है:

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1. पहले दो कॉलम में से किसी एक से अपनी लंबाई देखें ।

2. अपनी उँगली को आगे ले जाते हुए पाउंड में अपना वजन देखें ।

3. उँगली को ऊपर ले जाकर अपना बीएमआई नंबर देखें (19-35) ।

4. सबसे ऊपर की पंक्ति को देखें कि आपका अंतरण कहाँ पर आता है ।

Essay # 2. मोटापे की व्यापकता (वयस्क) (The Pervasiveness of Obesity):

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इस बात को सत्यापित होने में लगभग 30 वर्ष लग गए कि अतिभोगी पाश्चात्य जीवनशैली के सेहत पर विपरीत प्रभाव हो रहे हैं, लेकिन आज मोटापे की महामारी इतनी साफ है कि शायद ही कोई नजरअंदाज कर सके । दुःखद बात यह है कि यहाँ से निकलकर विश्व के कई देशों में अनेक फास्ट फूड रेस्त्रां खुलने के साथ-साथ ही यह बीमारी भी तेजी से फैल रही है । मालूम होता है, अन्य देशों के लोग उत्तरी अमेरिकियों की इन गलत आदतों को आधुनिक चलन मानकर अपना रहे हैं । स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभाव भी तुरंत ही देखने को मिल रहे हैं ।

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में चीन में फास्ट फूड के रेस्त्रां ने बहुत तेजी से घुसपैठ की और उच्च वसा-युक्त आहार लेने वाले लोगों की संख्या बढकर जल्द ही 23 प्रतिशत से 87 प्रतिशत हो गई । अधिक वजन वाले व्यक्तियों की संख्या बढकर 9 प्रतिशत से 15 प्रतिशत हो गई । फिर भी यह संयुक्त राज्य अमेरिका से तो बेहतर ही है, जहाँ वयस्कों में 61 प्रतिशत लोग अधिक वजन वाले हैं ।

कुछ यूरोपियन देशों और जापान में मोटापे की दर बढकर 40 प्रतिशत हो गई है, जहाँ हर तीन में एक पुरुष अधिक वजन वाला है । जापान में इस चौंका देने वाली वृद्धि का कारण फास्ट फूड के रेस्त्रां की श्रृंखला ही है जो अब सब जगह देखी जा रही है, इसमें अन्य चीजों के साथ मिलता है जापानियों का पसंदीदा मेयोनेज टॉपिंग वाला पिज्जा । ज्यादातर व्यक्ति, जो मोटापे से ग्रसित हैं वे दक्षिण प्रशांत में ही पाए जाते हैं, जिन्होंने अपनी सक्रिय जीवनशैली छोडकर ऐसा जीवन अपना लिया है । इसीलिए यहाँ मोटापे की दर विश्व में सबसे अधिक है । यह बदलाव बहुत नुकसानदायक है ।

Essay # 3. मोटापा से होने वाले रोग (Diseases Caused due to Obesity):

I. बच्चों में मोटापा (Obesity in Children):

मोटापा जाने-अनजाने बच्चों को कई तरह से नुकसान पहुँचा सकता है, लेकिन हम अपने बच्चों के लिए जो सबसे नुकसानदायक काम कर सकते हैं – वह है, उनमें खान-पान संबंधी खराब आदतें डालना । ऐसा करके, खुद ही खराब स्वास्थ्य परोस कर उन्हें दे रहे हैं ।

खान-पान की गलत आदतें सिखाने का असर उनके जीवन के हर पहलू पर पडता है ये गलत आदतें उनके रंग-रूप के साथ-साथ भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती हैं और जीवनकाल के अंत तक साथ रहती हैं । मोटापे के शिकार छह से ज्यादा की उम्र के कम से कम आधे बच्चों और किशोरों में से 70 से 80 प्रतिशत, वयस्क होने के बाद भी मोटापे से मुक्त नहीं हो पाते ।

बच्चों को शुरुआत से ही अस्वास्थ्यकर खाद्य खिलाने पर जोर देते हैं और अच्छे पोषण के सिद्धांत सिखाने में कोताही कर जाते है तो इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं । ‘इंटरनेशनल ओबेसिटी टास्क फोर्स’ ने अनुमान लगाया है कि विश्व के 22 लाख बच्चे अधिक वजन वाले हैं या मोटे हैं ।

संयुक्त राज्य अमेरिका में 10 वर्ष के 27 प्रतिशत बच्चे इसी श्रेणी में आते हैं, जो विश्व में माल्टा (33 प्रतिशत) और इटली (29 प्रतिशत) के बाद तीसरा सबसे अधिक प्रतिशत है । कनाडा में हुए एक हालिया सर्वेक्षण ने दर्शाया कि आधे से अधिक कैनेडियन बच्चे अपने बचपन में किसी न किसी समय अधिक वजन के रहे हैं ।

यहाँ तक कि अफ्रीका के कुछ भागों में बच्चे भुखमरी से ज्यादा अधिक वजन के शिकार हैं । गरीब देशों में भी मोटापे का खतरा है, क्योंकि अस्वास्थ्यकर खाद्य सामान्य तौर पर सस्ता होता है और इसलिए सभी की पहुँच में होता है । यह पोषण रहित होते हुए भी कैलोरी तो देता ही है । पोषक तत्वों से भरपूर भोजन ही ऐसा है, जो मुश्किल से मिलता है ।

अक्सर बच्चों के कुछ अतिरिक्त पाउंड बढाने को लेकर जोर देने के आदी होते हैं, जबकि अपने बच्चों के वजन के बारे में चौकन्ना रहना महत्वपूर्ण है । यह केवल सुंदरता से जुड़ा मुद्‌दा नहीं, उससे कहीं अधिक है । क्योंकि अधिक वजन या मोटापा कई बडी बीमारियों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भरा कारण है ।

बच्चे हमारा भविष्य हैं और हमारा कर्तव्य बनाता है कि हम उन्हें स्वस्थ खान-पान की आदतों की शिक्षा दें, जो जिंदगी भर चलेंगी, वरना वे बहुत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं उत्पन्न कर सकती है ।

अधिक वज़न या मोटापे से होने वाले सामान्य स्वास्थ्य के खतरे:

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुमान लगाया है कि बहुत जल्द ही स्वास्थ्य पर मोटापे का असर भी धूम्रपान की तरह ही पडेगा । दुनिया में मौत के 10 बढते कारणों में से चार कारणों हृदय रोग, मधुमेह, पक्षाघात और कैन्सर की वजह मोटापा है ।

संयुक्त राज्य अमेरिका में हर वर्ष 3,00,000 से अधिक समयपूर्व मौतों का कारण मोटापा ही होता है और इस पर हर साल 61 अरब डॉलर से अधिक खर्च होता है ।

II. हृदय रोग (Heart Disease):

‘न्यू इंग्लैंड जरनल ऑफ मेडिसिन’ के अनुसार हृदयाघात होने का खतरा मोटे व्यक्तियों में दोगुना और अधिक वजन वाले व्यक्तियों में एक-तिहाई बढ जाता है । इसके साथ, अधिक वजन वाले व्यक्तियों की औसत आयु कम होती है । इनमें हृदय रोग होने की आशंका सामान्य वजन वाले व्यक्तियों की अपेक्षा सात वर्ष पहले ही पैदा हो जाती है ।

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