शास्त्रीय अर्थशास्त्री और उनके योगदान की सूची | Here is a list of classical economists and their contribution in Hindi language.

1. जेम्स मिल [James Mill (1773-1836)]:

जेम्स मिल का जन्म 1773 ई. में हुआ था । वह प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन स्टुअर्ट मिल का पिता था । जेम्स मिल ने एक दार्शनिक, अर्थशास्त्री, उपयोगितावादी एवं इतिहासकार के रूप में ख्याति प्राप्त की । उसने एडिन बरोह विश्वविद्यालय में शिक्षा पाई । 1802 ई. में लन्दन आकर वह लिटरेरी जर्नल और सेण्ट जेम्स क्रानिकल का सम्पादक बना । वह मौलिक दार्शनिकवाद के नेता बैन्थम का अनुयायी था ।

जेम्स मिल के अनुसार, राजनीतिक अर्थव्यवस्था का अध्ययन चार खोजों से संबंधित है:

(क) उत्पादन को नियमित करने वाले नियम,

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(ख) वितरण संबंधी नियम,

(ग) वस्तुओं के विनिमय को नियमित करने वाले नियम, और

(घ) नियम जो उपयोग को नियमित करते हैं ।

2. जॉन रेमजे मैककलॉ [John Ramsay Mcculloch (1789-1864)]:

मैककलॉ का जन्म ह्विटहार्न में 1789 में हुआ था और उसने एडिनबरोह विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की थी । वह एडम स्मिथ एवं रिकार्डो का महान अनुयायी था । उसने अपने विचार अधिक स्पष्ट एवं असीमित शब्दों में दिए । 1825 में उसने अपनी Principle of Political Economy पुस्तक प्रकाशित की । 1828 में वह राजनीतिक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में लन्दन विश्वविद्यालय में नियुक्त हुआ ।

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मैककलॉ एक महान अर्थशास्त्री और सांख्यिकी का ज्ञाता था । उसने सांख्यिकी शब्दकोशों को एकत्रित किया, बहुत सारे निबंध एवं विशिष्ट लेख लिखे और डेविड रिकार्डो की जीवनी लिखी । वह पूर्णरूप से इंग्लिश परम्परावाद द्वारा शासित था ।

3. जॉन बापतिस्त से [John Baptiste Say (1767-1832)]:

जे.बी.से, स्मिथ, माल्थस एवं रिकार्डो द्वारा निर्मित क्लासिकी परम्परा का अनुयायी था । जे.बी.से ने आर्थिक विचार को अपना योगदान दिया । वह फ्रांस के प्रतिष्ठित सम्प्रदाय का संस्थापक था । से एडम स्मिथ की Wealth of Nations के सम्पर्क में संयोग से आया, इस पुस्तक ने उसको अत्यन्त प्रभावित किया ।

उसने कहा, ”जब हम इस पुस्तक को पढ़ते हैं तो यह अनुभव होता है कि स्मिथ से पहले राजनीतिक अर्थव्यवस्था जैसी कोई चीज नहीं थी” ।  से ने एडम स्मिथ के कार्य की व्याख्या की । यह कहना अनुचित होगा कि से केवल स्मिथ के विचारों को प्रचलित करने वाला था । वास्तव में, वह स्मिथ का एक सच्चा शिष्य था । उसने सावधानीपूर्वक भेदभाव के साथ अपने गुरु के विचारों का पुनर्विचार और पुनरावलोकन किया । उसने उसमें से कुछ का विकास किया और अन्यों पर बल दिया ।

से के अनुसार ”स्मिथ की रचना केवल राजनीतिक अर्थव्यवस्था के ठोस सिद्धांतों का एक अव्यवस्थित संग्रह है…..। उसकी पुस्तक वास्तविक ज्ञान से मिले-जुले विचारों का एक बहुत बड़ा गड़बड़ घोटाला है ।” जे.बी.से ने स्मिथ के विचारों को स्पष्ट एवं क्रम रूप में प्रस्तुत करके लोकप्रिय करने का प्रयास किया था ।

4. जॉन हैनरिक वॉन थ्यूनन [John Heinrich Von Thunen (1783-1850)]:

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वॉन अनन निःसन्देह जर्मनी का सबसे बुद्धिमान विचारक था । उसका महान विश्लेषणात्मक मस्तिष्क आर्थिक समस्याओं के विश्लेषण में समर्पित था । इस प्रकार उसके सामान्य मतों के आधार पर उसे एडम स्मिथ के अनुयायियों के वर्ग में रखा जा सकता है और लगान के क्षेत्र में विस्तृत कार्य के कारण उसे जर्मनी का रिकार्डो कहा जा सकता है । किन्तु वॉन खूनन को अनेक वैज्ञानिक खोजों के लिए श्रेय देने के अतिरिक्त, उसका विश्लेषण के यंत्रों एवं तकनीकों में भी योगदान है जो बाद में लोकप्रिय हुए थे ।

5. हैनरी चार्ल्स केरी [Henry Charles Carey, (1793-1879)]:

हेनरी चार्ल्स केरी एक अमेरिकन तथा एक प्रकाशक का पुत्र था । केरी अधिक विश्लेषणात्मक सामर्थ्य नहीं रखता था और उसके यथार्थ का निरीक्षण भी कमजोर था ।

केरी आशावादी था । वह तीव्र विस्तार एवं अत्यधिक अवसर के काल युग का साक्षी था । उसका आशावाद कृषि में उत्पत्ति ह्रास एवं अत्यधिक जनसंख्या के खतरों की निरर्थकता के प्रति विश्वास प्रदान करता था । वह मानता था कि मनुष्य का भविष्य उज्जल है और अत्यधिक जनसंख्या का कोई खतरा नहीं है ।

ईश्वर मनुष्य को उत्पत्ति सीमा के लिए इच्छित सीमा के अन्तर्गत निर्देशित करते हैं । बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ आर्थिक प्रगति होती है और समय के साथ प्राकृतिक वृद्धि पर मनुष्य का नियंत्रण बढ़ता है इसलिए निराशावादी होने का कोई कारण नहीं ।

जब अतिरिक्त भूमि खेती के अन्तर्गत ली जाती है, श्रम की उत्पादकता बढ़ जाती है एवं आर्थिक उन्नति होती है । केरी प्रकृति के सार्वभौमिक नियम को मानता था तथा उसने वर्ग-हित के विरोध को समाप्त किया उसने यह भी प्रतिपादित किया कि प्रकृति एवं मानवीय बुद्धि इसे देखेंगे कि जनसंख्या इच्छित सीमा से अधिक नहीं बड़े ।

केरी निसन्देह एक महान अर्थशास्त्री था । वह संबंध एवं प्रकृति पर मनुष्य के नियंत्रण में विश्वास करता था । उसके अध्ययन की विधि-निगमन, आगमन एवं सांख्यिकीय विधियों का मिश्रण थी । वह परम्परावाद के दो स्तम्भ-घटते प्रतिफल का नियम एवं जनसंख्या के सिद्धांत की आलोचना करता था । उसका आशावाद अति प्रकार का था जो अधिक समर्थन नहीं पा सका है ।

उसके विलेषण में क्रम का अभाव था और प्रणाली एवं उसके विचार पूर्णरूप से विरोधी थे । आर्थिक विचारों के क्षेत्र में उसने सिद्धांत पर नियंत्रित बल दिया था और इसी तकनीकी अभाव के कारण उसकी ख्याति प्रभावित हुई थी । इन सभी देशों के बावजूद आर्थिक विचार के इतिहास में वह निःसन्देह एक महत्वपूर्ण व्यक्ति है ।

6. जॉन स्टुअर्ट मिल [John Stuart Mill (1806-73)]:

जॉन स्टुअर्ट मिल परम्परावादी सम्प्रदाय के निर्माताओं में से एक था । वह ऐसे समय पर उपस्थित हुआ जब राजनीतिक अर्थव्यवस्था की पुनर्व्याख्या की आवश्यकता थी । स्मिथ रिकार्डो माल्थस द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों में नई समस्याओं के संदर्भ में पुनरावलोकन एवं संशोधन की आवश्यकता थी ।

मिल का कार्य, आर्थिक विकास में एक युग का अंत और दूसरे युग की शुरुआत का अग्रदूत है । मिल का व्यक्तित्व दो विचारधाराओं, परम्परावाद और समाजवाद का प्रतिनिधित्व करता है । जॉन स्तुअर्ट मिल, का जन्म 5 मई, 1806 को लन्दन में हुआ था ।

वह बड़ा तेज बालक था और 15 वर्ष की आयु में वह ग्रीक, लेटिन, तर्कशास्त्र इतिहास साहित्य राजनीतिक अर्थव्यवस्था रोमन एवं अंग्रेजी कानून का अध्ययन कर चुका था । उसने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के कार्यालय में काम किया और कार्यकारी वर्गों एवं महिलाओं के आर्थिक उत्थान के लिए 1823 से 1868 तक काम किया । उसकी मृत्यु 1873 में फ्रांस में हुई ।

उसने विभिन्न क्षेत्रों जैसे दर्शन राजनीतिशास्त्र एवं अर्थशास्त्र पर अनेक पुस्तकें लिखीं । The Principle of Political Economy उसकी मुख्य कृति है इसका सातवां संस्करण 1871 में प्रकाशित हुआ । यह पांच पुस्तकों में विभाजित है- उत्पादन, वितरण, विनिमय उत्पादन में समाज की प्रगति का प्रभाव एवं वितरण और सरकार का प्रभाव । उसने क्लासिकी आर्थिक सिद्धांत में कुछ भी नहीं जोड़ा किन्तु उसने पूर्वजों के सिद्धांतों की पुनर्व्याख्या की ।

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