चींटियों की कॉलोनियों का विकास कैसे करें? Read this article in Hindi to learn about how to develop colonies of ants.

वह सामाजिक कीट जिससे हमारा बार-बार पाला पड़ता है वह है चींटिया । चाहे वे काटने वाली लाल चींटी हो अथवा गुदगुदी करने वाली काली चींटी सभी हमारे घरों के आस-पास पाई जाती हैं । यदि हमें कोई चींटी न दिखे और हम उन्हें देखना चाहते हैं तो कुछ मीठा (शक्कर) बाहर रख दे । कुछ ही देर में वे प्रकट हो जाएगी । इन्हें लाइन में जल्दी जाते हुए, एक दूसरे को पार करते समय स्पर्श करते हुए तथा स्वयं के आकार से बड़ी वस्तु को ले जाने के लिए एकत्र होते हुए देखना बहुत आकर्षक हो सकता है ।

दीमक के विपरीत चींटियां ऊपरी सतह के पास ही रहती है तथा अपना कार्य प्रकाश में ही करती हैं, वे अधिक तापमान तथा सूखे को सहन कर लेती हैं । इसलिये किसी कृत्रिम गृह में चीटियों की कॉलोनी विकसित करना बिना अधिक कष्ट के संभव हो सकता है ।

एक चींटीगृह (फॉर्मिकैरियम) को निम्न प्रकार से बनाया जा सकता है:

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(1) चार 15 से.मी. लें व इन्हें टेप से चिपका कर एक चौकोर फ्रेम बनाएँ । तली के लिए 20 से.मी. × 120 से.मी. काँच अथवा प्लास्टिक की शीट का उपयोग करें ।

(2) गेहूँ के आटे को कड़ा सांध लें तथा उसे न चिपकने वाला बनाने हेतु तेल लगाएँ (शीत ऋतु में वनस्पति अथवा तिल का तेल लगाएँ) |

(3) आटे से एक 10 से.मी. लंबा व रूलर की मोटाई से दो तिहाई मोटा एक सिलेण्डर बनाएँ व उसे फ्रेम के अंदर एक ओर रख दें, फिर रूलर की मोटाई से आधी मोटाई के सिलेण्डर रोल करें तथा उन्हें आधार प्लेट पर एक जुड़े हुए डिजाइन के रूप में जमाएँ । उसके कोनों के जोड़ा पर कुछ आटे की गोलियाँ रखें । यह सुनिश्चित करें कि आटे और फ्रेम की सभी बाजुओं के बीच कम से कम 20 से.मी. का अतर हो, आटे की सभी बिन्दुओं पर हल्का सा दबाए जिससे वह नीचे प्लेट पर ठीक से चिपक जाए ।

(4) 500 ग्राम ताजे प्लास्टर ऑफ पेरिस को पानी में घोलकर गारा स्तर तैयार करें जो गाढ़ा हो किंतु बहने वाला हो । आमतौर से मिलने वाला प्लास्टर ऑफ पेरिस सस्ता होता है तथा उससे काम चल सकता है अन्यथा कीमती तथा जल्दी जमने वाले प्लास्टर ऑफ पेरिस से प्रयोग व प्रैक्टिस के द्वारा आप उपयुक्त गारा बना सकते हैं ।

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(5) आपके मित्र को फ्रेम की काँच की प्लेट पकड़ने के लिए कहें तथा गारे को आटे के डिजाइन के ऊपर समान रूप से इस प्रकार फैला दें जिससे संपूर्ण फ्रेम ढक जाए । यह सुनिश्चित कर लें कि गारे में कोई हवा का बुदबुदा न रह जाए ।

(6) फ्रेम के ऊपर एक लंबा रूलर घुमाएँ जिससे कि वह गारा फ्रेम के सभी भागों में पूर्ण रूप से फैल जाए तथा अधिक गारा बाहर निकल आए । इससे चींटीगृह के पीछे की बाजू को चिकनी सतह मिल जाएगी ।

इसे कुछ समय के लिए अलग रख दें जिससे प्लास्टर जम जाए कोनों में लगी टेप को काट कर फ्रेम को अलग कर लें । रात भर सूखने के बाद प्लास्टर के चौकोर को कांच की प्लेट से हटा लें तथा आटे को किसी नरम सपाट चम्मच या स्टिक से हटा लें यह चम्मच इतना पतला होना चाहिए जो खाचों में आसानी से पहुँच सके । अभी प्लास्टर नरम ही होगा अंत: धीरे-धीरे काम करें । आटे का कुछ भाग कोनों में चिपके रह सकता है जो पूर्ण रूप से सूखने पर निकल आएगा । इस संपूर्ण चींटीगृह को पूर्णत: सूखने दें ।

इसमें कई दिन लग सकते हैं । इसे साफ करें व किनारों को चिकना कर लें । एक कोने में कुछ मिट्‌टी तथा पत्तियों का कचरा दाल दें जो चौड़े कोनों से दूर हो । चौड़े कोनों में खाद्य पदार्थ रख दें, यदि खाना खुला रखा होगा तो चींटियां

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आयेंगी । जब चींटिया अंदर आ जायें तो घर को कांच की प्लेट से ढक दें तथा उस पर कार्डबोर्ड रख दें । यदि कुछ देर बाद आप कार्डबोर्ड हटायेंगे तो देखेंगे कि चींटियां अपने छिपने के स्थान तथा भोज्य पदार्थ के बीच आ जा रहीं हैं ।

चूंकि पकड़ी हुई चींटिया केवल कार्यकर्ता ही होंगी इसलिये वे ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहेंगी । चींटीगृह में चींटियों की सजीव (जिसमें जीने योग्य स्थान हो) कालोनी रखने के लिये उसे बड़ा बनायें (30 × 30 वर्ग से.मी. या बड़ा) तथा उसमें एक रानी चींटी को ढूंढ कर रखें । चीटियों के छले आपको पत्थरों अथवा लकड़ी के नीचे मिल सकेंगे । रानी चींटी साधारण चींटी से आकार में पांच गुना बड़ी होती है ।

चींटीगृह के पीछे के भाग में कुछ मिट्‌टी व पत्तियों का कचरा रख दें तथा उसे कार्डबोर्ड से ढक दें । सामने का भाग तथा खाने के कक्ष को काँच से ढककर देखने योग्य कर लें कुछ परीक्षणों के बाद आप एक चींटी की कॉलोनी विकसित करने में सफल होंगे तथा चींटियों का अवलोकन कर उनके बारे में जानकारी ले सकेंगे ।

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