कीटों का शारीरिक नियंत्रण: छह तरीके | Read this article in Hindi to learn about the five ways used for physical control of pests. The ways are:- 1. ऊष्मा (Heat) 2. शीत (Cold) 3. नमी (Moisture) 4. प्रकाश (Light) 5. विद्युत (Electricity) 6. परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy).

भौतिक कारकों जैसे तापमान, नमी, प्रकाश, विद्युत तथा परमाणु ऊर्जा को नाशक कीटों की जनसंख्या को नियन्त्रण में रखने के लिए सफलतापूर्वक प्रयोग में लाया जाता है । तापमान तथा नमी दोनों कारकों के बहुत अधिक घटने या बढ़ने से कीटों की जनसंख्या पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और नाशक कीटों की संख्या वृद्धि की दर कम होती है ।

Way # 1. ऊष्मा (Heat):

भंडारित अनाज, फल, भूमि, कद, फर्नीचर, बिस्तर तथा कपडों आदि पर आक्रमण करने वाले नाशक कीटों को बहुत ऊँचे तापमान द्वारा मारा जाता है । यदि किसी भी कीट से कुछ समय के लिए 140 से 150°F के तापमान पर रखा जाये तो वह जीवित नहीं रह सकता ।

अधिकतर नाशक कीट 125 से 130°F के तापमान पर 3 घंटे में ही मर जाते है । संक्रमित भंडारित अनाज के जून में पक्के फर्श फैलाने से सूर्य की ऊष्मा के कारण अनाज के अधिकतर नाशक कीट मर जाते है ।

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कपास के गोले की लाल सुण्डी-पेक्टीनोफीरा गौसीपिएला (Pink Boll Worm-Pectinophora Gossypiella) कपास गोलकों को 5 मिनट तक 125°F पर रखने से कीट की सुप्तावस्था में पड़े डिम्भक मर जाते हैं । वूलीबियर-एन्थ्रेनस वोरैक्स (Anthrenus Vorax) ऊनी कपड़ों को भाप देने से उसकी ऊष्मा से मर जाते हैं ।

आजकल बाजार में ऊष्मा उपचार के लिए अनेक प्रकार की ऐसी मशीनें भी उपलब्ध हैं जिनमें से जब भण्डारित अनाज गुजारा जाता है तब अनाज का तापमान बढ़ा देती हैं । यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऊष्मा उपचार के बाद पानी निकलने के कारण अनाज के दाने अकसर सिकुड़ जाते हैं ।

ऊष्मा का प्रयोग अनाजों के टिनों पर, सामानों के गट्ठरों पर या कपडों के ढेर पर करने से ऊष्मा उनके अन्दर प्रवेश करने में तो काफी समय लगता है परन्तु सतह का ताप कीटों के मारने योग्य हो जाता है ।

Way # 2. शीत (Cold):

भंडारित वस्तुएँ या जिन मिलों में भण्डारण योग्य वस्तुएँ बनती हैं वहाँ का तापमान कृत्रिम रूप से कम रखने पर नाशक कीटों से होने वाली हानि बहुत ही कम की जा सकती है ।

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शीतलीकरण का यह उपाय उच्च ताप द्वारा नाशक कीटों को मारने से कम प्रभावकारी है किन्तु भंडारित खाद्यान्न या कपडों को बर्फ जमने के तापमान या उससे नीचे के तापमान पर रखने से नाशक कीटों द्वारा होने वाली क्षति ले रोका जा सकता है ।

अधिकतर कीट 40 से 60°F पर निष्क्रिय हो जाते हैं और विशेषतः 40°F से कम तापमान पर नाशक कीट किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाते । नाशक कीटों को मारने के लिए एकाएक अधिक से बहुत कम तापमान कर देना या बहुत कम से एकाएक अधिक तापमान कर देना अधिक प्रभावकारी होता है ।

Way # 3. नमी (Moisture):

भोजन तथा अन्य पदार्थों में उपस्थित नमी की मात्रा में अधिकता व कमी होने से कीटों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । अनाजों में नमी 8% से भी नीचे हो जाने पर इनमें नाशक कीटों का संक्रमण नहीं हो पाता ।

छेदक घुनों के संक्रमण से लकड़ी को 15 दिन तक पानी में डुबो कर मुक्ति पायी जा सकती है । मच्छरों पर नियन्त्रण पाने के लिए बेकर व रुका हुआ पानी निकल देना चाहिए क्योंकि मच्छरों का विकास रुके हुए पानी में ही होता है ।

Way # 4. प्रकाश (Light):

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बाह्य कारकों में प्रकाश भी एक ऐसा कारक है जो नाशक कीटों को नष्ट करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । बहुत से कीट प्रकाश की ओर आकर्षित होते हैं । इस विषय में अनेक अनुसंधान किये जा रहे हैं कि कौन-कौन से कीट किस आवृत्ति के प्रकाश की ओर आकर्षित होते हैं ।

यह पाया गया है कि अनेक कीट स्पेक्ट्रम के पीली व लाल प्रकाश की अपेक्षा नीले तथा पराबैंगनी प्रकाश की ओर आकर्षित होते हैं । इस विधि में नाशक कीट एक स्थान पर एकत्रित करके मार दिए जाते हैं ।

Way # 5. विद्युत (Electricity):

इस विधि में नाशक कीटों को उच्च विभव के स्थिर विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है जिससे कीट के शरीर में बहुत गर्मी उत्पन्न होती है और वे मर जाते हैं । आजकल नाशक कीटों से संक्रमित अनाज व अनाज उत्पाद के उपचार के लिए अनेक प्रकार की मशीनें उपलब्ध हैं ।

जब इन मशीनों के उच्च आवृत्ति (High Frequency) वाले स्थिर विद्युत क्षेत्र (Electro-Static Field) के इलेक्ट्रोडों के बीच से संक्रमित अनाज या दूसरे पदार्थों को निकाला जाता है तब नाशक कटि शीघ्र ही मर जाते हैं ।

Way # 6. परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy):

नाभिकीय भौतिकी के क्षेत्र में किये गये-नये अनुसंधानों ने नाशक कीटों के प्रबन्धन के क्षेत्र में नये द्वार खोल दिये हैं । कोरेको द्वीप (Curaco Island) में स्क्रूवर्म-कैलीट्रोगा होमीनीवोरेक्स इगर (Screwworm Callitroga Hominivorax Egre) का सफलतापूर्वक नाश का दिया गया है जो पशुओं का नाशक कीट है ।

इस कार्यक्रम में स्क्रूवर्म के नरों को रेडियोधर्मी आइसोटोपों द्वारा बंध्य कर दिया गया । इस प्रकार के दूसरे आयनकारी विकिरण (Ionizing Radiations) हैं- एल्फा कण या हीलियम नाभिक (या केन्द्र) (Helium Nuclci) बीटा कण या तेज गति वाले इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रान तथा विद्युत चुम्बकीय (Electro Magnetic) गामा किरणें या कम तरंग-दैर्ध्य वाली X-किरणें ।

परमाणु ऊर्जा द्वारा नाशक कीटों के सफल नियन्त्रण के लिए निम्न परिस्थितियाँ उपयुक्त होती हैं:

(1) नियंत्रण कार्यक्रम एक निश्चित स्थान में ही चलाये जायें ।

(2) नाशक कीटों के पालने (Rearing) की अच्छी विधियाँ ज्ञात होनी चाहिए ।

(3) वंध्याकरण के पश्चात सभी नरों को सारे क्षेत्र में अधिक संख्या में फैला देना चाहिए ।

(4) नाभिकीय विधियों द्वारा किये गये वंध्याकरण का प्रभाव नर की मैथुन क्षमता पर नहीं पड़ना चाहिए ।

(5) यह कार्यक्रम उन्हीं जातियों में सफल होता है जहाँ मादा अपने जीवन में एक ही बार मैथुनरत होती है ।

रेडियोधर्मी आइसोटोपों का सामान्य घरेलू मक्खी व भंडारित अनाज आदि के नाशक कीटों में प्रयोग के क्षेत्र में एटामिक एनर्जी एस्टेबलिशमैंट (Atomic Energy Establishment) ट्राम्बे, बम्बई में अनुसंधान कार्य प्रगति पर है ।

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