Read this article in Hindi to learn about:- 1. उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of Industries) 2. उद्योगों का अवस्थिकरण के कारक (Locational Factors of Industries) 3. भारत की समस्याएं (Problems of India).

उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of Industries):

उद्योगों में नाना प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है ।

उद्योगों को निम्न तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

i. प्राइमरी उद्योग (Primary Industries):

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इस वर्ग में कोयले पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस से ऊर्जा का उत्पादन करना, कृषि आधारित उद्योग तथा बॉक्साइट से एल्यूमिनियम तैयार करना ।

ii. द्वितीयक उद्योग (Secondary Industries):

इस वर्ग में भारी उद्योग सम्मिलित किए जाते है; जैसे-भारी मशीनों का निर्माण, इंजीनियरिंग, धातु उद्योग, पोत-निर्माण, लोकोमोटिव, क्रेन तथा बिजली उत्पादन उपकरण, प्लास्टिक तथा पुस्तकों का प्रकाशन ।

iii. तृतीयक उद्योग (Tertiary Industries):

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इस वर्ग में व्यापार, वाणिज्य परिवहन, दूरसंचार, मनोरंजन, शिक्षा, पर्यटन तथा प्रशासन सम्मिलित हैं ।

उद्योगों का अवस्थिकरण के कारक (Locational Factors of Industries):

विभिन्न उद्योग अलग स्थानों पर लगाए जाते हैं । किसी भी कारखाने की स्थापना भौतिक आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कारणों को ध्यान में रखकर की जाती है ।

उद्योगों को स्थापित करने वाले कारक निम्न प्रकार हैं:

(i) कच्चे माल की उपलब्धि,

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(ii) ऊर्जा की उपलब्धि,

(iii) कुशल तथा सस्ते मजदूर,

(iv) पूँजी,

(v) उद्योगपति, जो जोखिम उठाने की क्षमता रखता हो,

(vi) बाजार (घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय),

(vii) प्रबंधन क्षमता,

(viii) जलवायु,

(ix) राजनैतिक स्थिरता

(x) मूलभूत सुविधाएँ (बिजली, पानी और सड़क),

(xi) ढुलाई भाडो की सुविधाएँ, वेबर महोदय के अनुसार किसी उद्योग को स्थापित करने में कच्चे और पक्के माल का ढुलाई भाड़ा निर्णयक होता है ।

भारत की औद्योगिक समस्याएं (Industrial Problems of India):

भारत एक उभरती हुई औद्योगिक शक्ति है, परंतु भारत बहुत-सी औद्योगिक समस्याओं से दो-चार हैं ।

भारत की प्रमुख औद्योगिक समस्याएँ निम्न प्रकार हैं:

1. औद्योगिक मूलभूत सुविधाओं का अभाव (Inadequate Industrial Infrastructure):

भारत में औद्योगिक मूलभूत सुविधाओं; जैसे-सड़क, बिजली, पानी, परिवहन एवं सुरक्षा का अभाव है । रोड तथा रेलों पर भारी दबाव है तथा परिवहन की गति मध्यम है जिसके कारण कच्चे एवं पक्के माल के लाने-ले जाने में कठिनाई एवं देरी होती है ।

2. कच्चे माल की कमी (Inadequacy of Raw Material):

भारत में ताँबे, बॉक्साइट तथा उत्तम प्रकार के लोहे खनिज एवं बिटुमिनस कोयले की कमी है । बहुत-से खनिजों का आयात करना पड़ता है । इनके अतिरिक्त रसायन-उद्योग के लिए कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस तथा फास्फेट का आयात करना होता है जिससे उत्पादन में फर्क पड़ता है ।

3. राजकीय क्षेत्र में घाटा (Loss in Public Sector):

अधिकतर सरकारी क्षेत्र की औद्योगिक इकाई घाटे में चलती है । इनके प्रबंधन पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगा हुआ है । बहुत-सी सरकारी औद्योगिक इकाइयों को निजीकरण में परिवर्तित किया जा रहा है ।

4. औद्योगिक इकाइयों का घाटे में चलना (Industrial Sickness):

भारत में निजी सेक्टर तीव्र गति से बढ़ रहा है, परंतु बहुत-सी निजी उद्योग भी घाटे में चल रहे हैं ।

इनके घाटे में चलने के मुख्य कारण:

(i) कमजोर प्रबंधन,

(ii) कच्चे माल एवं ऊर्जा संसाधनों का दुरुपयोग,

(iii) महँगाई,

(iv) उत्पादन की माँग में कमी,

(v) श्रमिकों की हड़ताल इत्यादि ।

5. उद्योगों का क्षेत्रीय संकेद्रण (Regional Concentration of Industries):

भारत के अधिकतर उद्योग कुछ विशेष क्षेत्रों में केंद्रित हैं । उदाहरण के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिम बंगाल औद्योगिक दृष्टि से अधिक विकसित हैं, जबकि उत्तरी भारत तथा उत्तरी पूर्वी भारत के राज्य औद्योगिक विकास में पीछे हैं ।

6. कृषि पर आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की कमी (Shortage of Raw Material for Agro-Based Industries):

भारत के अधिकतर भाग की कृषि मानसून पर आधारित है । भारतीय कृषि को प्रायः मानसून पर सट्टा “Gamble on Monsoon” कहा जाता है । बाढ़ तथा सूखे के कारण फसलें खराब हो जाती हैं जिससे कृषि से मिलने वाले कच्चे माल का अभाव होता है और औद्योगिक उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।

7. पूँजी का अभाव (Lack of Capital):

उदारीकरण एवं भूमंडलीकरण के बावजूद उद्योगों में निवेश करने के लिए धन का अभाव है । विदेशी निवेश भी पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रहा ।

8. सरकारी नीतियाँ (Government Policies):

भारत सरकार की बदलती औद्योगिक नीतियों का उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है । यदि उपरोक्त समस्याओं का समाधान निकाला जाए तो भारत के औद्योगिकीकरण की गति में तीव्रता आ सकती है ।

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