निजीकरण की वृद्धि: नौ मुख्य कारण | Read this article in Hindi to learn about the nine main causes of growth of privatisation. The causes are:- 1. समाजवादी आर्थिकता का विघटन (Disintegration of Socialist Economics) 2. अकुशल सार्वजनिक क्षेत्र (Inefficient Public Sector) 3. अलाभकारी कीमत नीति (Uneconomic Price Policy) and a Few Others.

निजीकरण के मुख्य कारणों को निम्न में विस्तारित किया गया है:

Cause # 1. समाजवादी आर्थिकता का विघटन (Disintegration of Socialist Economics):

समाजवादी आर्थिकता सार्वजनिक क्षेत्र के हक में है । इस आर्थिकता को मॉडल के रूप में लेने पर, लगभग सभी अविकसित देश सार्वजनिक क्षेत्र के लिए अत्यधिक महत्तता को देते हैं । परन्तु बाद में सार्वजनिक उद्योग अकुशलता की और मुड़े और इसकी असफलता के लिए जिम्मेदार एकल कारण कारक को सिद्ध करे ।

रशियन अर्थव्यवस्था का इसके बाद विघटन हो गया । जिसके नतीजन, अन्य अर्थव्यवस्थाओं ने सार्वजनिक क्षेत्र में कुशलता में विश्वास को खो दिया । इसके विपरीत, USA जापान, जर्मनी आदि की अर्थव्यवस्थाएं निजी क्षेत्र के अधीन तेजी से प्रगति को किया । इस प्रकार विश्व की बाकी अर्थव्यवस्थाओं ने बाजार अर्थव्यवस्ता के प्रति आकर्षित हुई और उन्होंने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण को अनुकूलित किया ।

Cause # 2. अकुशल सार्वजनिक क्षेत्र (Inefficient Public Sector):

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सार्वजनिक क्षेत्र के प्रबंध को निर्णय लेने की आजादी नहीं है । सार्वजनिक क्षेत्र उद्योगों के ज्यादातर निर्णयों को मंत्रियों द्वारा लिया जाता है । उनके निर्णयों को बढावा दिया जाता है । निर्णयों में स्थापित सत्तावाद के कारण देरी होती है जिसके नतीजन, उत्पादन क्षमता का पूरी तरह से उपयोग नहीं होता और उत्पादन में गिरावट होती है । ये सभी कारक सार्वजनिक क्षेत्र को अकुशल करते हैं ।

Cause # 3. अलाभकारी कीमत नीति (Uneconomic Price Policy):

सार्वजनिक उपयोग सेवाओं जैसे बिजली, सिंचाई, यातायात और पानी आदि की कीमतों का निर्धारण व्यावसायिक सिद्धान्तों के आधार पर नहीं किया जाता । इनका निर्धारण राजनीति, सामाजिक और अन्य और गैर आर्थिक हालातों के आधार पर किया जाता है । अन्य न लाभ और न हानि का समर्थन करते हैं जिसके नतीजन निजीकरण ऐसे नुक्सानों को दूर करने की सलाह देता है ।

Cause # 4. सरकार पर बोझ (Burden on the Government):

सार्वजनिक क्षेत्र उद्योग द्वारा की गई हानियों को उनके प्रबंध या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा नहीं उठाया जाता । हानियां सरकारी आय से अच्छी बना, जाती है । मैनेजर इसलिए कमाए लाभ या हानियों से भिन्न होते हैं । उद्योग के कौशल और उत्पादकता की और कोई ध्यान नहीं दिया जाता । इसके आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सरकार ने निजीकरण को बढ़ावा दिया ।

Cause # 5. एशिया के नये औद्योगिक राष्ट्रों का अनुभव (Experience of New Industrial Nations of Asia):

एशिया जैसे जापान, हांगकांग, सिंगापुर, कोरिया, ताईवान के औद्योगिकीकरण ने निजीकरण की सहायता के साथ आर्थिक विकास की तेज दर को प्राप्त किया है । इसलिए अन्य देशों की सरकार ने निजी क्षेत्र को बढ़ाने के लिए गैर निजीकरण को अपनाने के बारे में सोचना शुरू किया है ।

Cause # 6. पूंजीकरण के लाभों को लेने के लिए (To Avail Benefits of Capitalisation):

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पूंजीवाद देशों जैसे जापान, यू एस ए, हांगकांग, सिंगापुर, कोरिया, ताईवान आदि में काफी सफल है पूँजीवाद के लाभों को विचार में लेकर, सरकार ने निजीकरण को अपनाने का निर्णय किया ।

Cause # 7. सरकार के वित्तीय संकटों का समाधान करना (To Solve the Financial Crisis of Government):

1990-91 में, भारतीय सरकार ने वित्तीय सकट का सामना किया और बुनियादी ढांचों को विकसित करने के लिए फंडों की कमी थी इन वित्तीय संकटों को पारिश्रमिक संबंधी कीमतों पर सरकारी इक्विटी के बिक्री हिस्से द्वारा हल किया जा सकता है और इस बिक्री से फंडों को प्राप्त किया जाता है, इसके अतिरिक्त सरकार 49 प्रतिशत इक्विटि और अपने साथ 51 प्रतिशत इक्विटी को रख कर औद्योगिक इकाई को नियन्त्रित कर सकती है ।

Cause # 8. वैश्वीकरण को बढ़ावा देने की मूल जरूरत (Basic Need for Promoting Globalisation):

प्रख्यात विद्यवान सोचते हैं कि वैश्वीकरण को निजीकरण द्वारा बढ़ावा दिया जा सकता है । इसका संबंध विदेशी निवेश और तकनीक के लाभों को प्राप्त करने के साथ है ।

Cause # 9. ओद्योगिक विकास को प्राप्त करना (For Achieving Industrial Growth):

निजीकरण तेज गति पर औद्योगिक विकास को प्राप्त करने के लिए लम्बे रास्ते की और जा सकते हैं क्योंकि यह अर्थव्यवस्था में मूल उद्योगों को बढ़ावा देने में सहायता करता है ।

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