कपड़े धोने के लिए सफाई एजेंटों का निर्माण कैसे करें? | Read this article in Hindi to learn about how to manufacture and produce cleansing agents for laundry purpose.

धुलाई का साबुन ऐसी अनिवार्य आवश्यकता है जिसका उपयोग लगभग प्रत्येक परिवार तथा लांड्री में किया जाता है । इस संदर्भ में यद्यपि शहरी क्षेत्रों तथा उच्च/उच्च मध्यम आर्थिक स्तर के परिवारों द्वारा सिंथेटिक साबुनों तथा डिटर्जेन्ट पाउडरों का उपयोग किया जाता है ।

ग्रामीण क्षेत्रों में तथा आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत पिछड़े परिवारों द्वारा अभी भी परम्परागत धुलाई का साबुन ही उपयोग में लाया जाता है । तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसका काफी विस्तृत बाजार है । इसके अतिरिक्त मध्य-प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा इस प्रकार के धुलाई साबुनों का निर्माण करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाता है ।

तथा यदि साबुन निर्माण की कोई इकाई ग्रामीण क्षेत्रों में (जिनका जनसंख्या 2000 से कम हो) स्थापित की जाये तो ऐसी इकाइयों को जीवन पर्यन्त विक्रय कर से शत प्रतिशत छूट प्राप्त करने की पात्रता होती है । अतः यदि ग्रामीण क्षेत्रों में साबुन निर्माण की इकाइयां स्थापित की जाये तथा उनमें गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनाये जायें तो ऐसी इकाइयों काफी सफलतापूर्वक चल सकती है ।

उत्पादन प्रक्रिया (Production Process of Cleansing Agents for Laundry):

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साबुन बनाने की प्रक्रिया काफी सरल तथा इस संदर्भ में परम्परागत रूप से तीन विधियाँ प्रचलन में है । यथा ठंडी प्रक्रिया कम उबालकर साबुन बनाने की प्रक्रिया तथा विभिन्न तत्वों को पूर्णतया उबाल कर साबुन बनाने की प्रक्रिया (सेमी बॉइल्ड प्रोसैस) उपयोग में लाई जायेगी जिसके अंतर्गत सर्वप्रथम पानी को गर्म किया जाता है तथा उसमें कास्टिक सोडा मिलाया जाता है ।

इसके उपरांत इसमें सोडियम सिलीकेट मिलाया जाता है । सोडियम सिलिकेट मिलाने के बाद इसे 2-2.5 घंटे तक उबाला जाता है । तथा तदुपरांत इसमें हार्ड आइल अथवा खाद्य तेलों की गाद अथवा अवशेष भी मिलाया जा सकता है । इस घोल को 60 से 70 अंश सेटीग्रेड तक गर्म किया जाता है ।

तथा इसके उपरांत इसमें रंग तथा परफ्यूम आदि मिलाए जाते है । इसके बाद इस घोल को सांचों में डाल जाता है जहां यह ठंडा हो जाता है । प्रायः इस घोल को ठंडा होने के लिए सर्दियों में छ: घटे तथा गर्मियों में 2 दिन तक का समय लग जाता है । इसके उपरांत इस ठंडे हुई मिश्रण की साईजिंग की जाती है ।

तथा स्टेम्पिंग (इसके ऊपर इकाई के ब्रांड नाम का ठप्पा लगाना) करने के उपरांत इसकी पैकिंग करके विपणन हेतु प्रस्तुत कर दिया जाता है । उच्च गुणवत्ता पूर्ण साबुन के निर्माण के लिए आवश्यक है कि मिश्रण में कम मात्रा में सोडियम सिलीकेट डाला जाये ।

उत्पादन लक्ष्य (Production Target of Cleansing Agents for Laundry):

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इस इकाई में वर्ष भर में घरेलू उपयोग हेतु कुल 50 टन घुलाई साबुन, बार, केक, चिप्स तथा पाउडर (Laundry Soap, Bar, Cake, Chips, and Powder) का निर्माण किये जाने का लक्ष्य है जिनकी रुपये प्रति टन की दर से बिक्री से वर्ष में कुल 875000 रुपये की प्राप्तियां होना अनुमानित है ।

इकाई के वित्तीय पहलू (Financial Aspects of the Cleansing Agent Manufacturing Entity):

1. कार्यस्थल की व्यवस्था (Work Arrangement):

इस इकाई की स्थापना हेतु 800 वर्ग फीट के कार्यस्थल की आवश्यकता होगी जिसका प्रतिमाह 2000 रुपये किराया देय होगा ।

2. मशीनरी तथा उपकरणों की आवश्यकता (Machinery and Equipment Requirement):

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इस इकाई में लगने वाले प्रमुख मशीनरी तथा उपकरण निम्नानुसार होंगे:

3. कच्चे माल की लागत (Cost of Raw Materials):

 

इस इकाई में लगने वाला प्रमुख कच्चा माल तथा उस पर आने वाली अनुमानित वार्षिक लागत का विवरण निम्नानुसार है:

4. कर्मचारियों/श्रमिकों की आवश्यकता तथा उनको दिया जाना वाला वेतन/पारिश्रमिक (प्रतिमाह) (Employees / Workers Need and Salary / Remuneration to be Paid to them (Per Month)):

 

इस इकाई के संचालन हेतु आवश्यक कर्मचारी एवं श्रमिक तथा उनको प्रतिमाह दिये जाने वाले वेतना/पारिश्रमिक का विवरण निम्नानुसार है:

5. उपयोगिताओं पर व्यय (प्रतिमाह) (Expenditure on Utilities (Per Month)):

इस इकाई में प्रयुक्त होने वाली प्रमुख उपयोगिताओं विद्युत ईंधन तथा पानी की है । ईंधन के रूप में इस इकाई के कोल ब्रिकेट्स अथवा लकड़ी के गुट्‌टे (जो कि आरा मशीनों से प्राप्त हो जाते है) प्रयुक्त होंगे । विद्युत ईंधन तथा पानी को मिलाकर इस इकाई में प्रतिमाह 2000 रुपये का अनुमान है ।

 

6. विविध खर्चे (प्रतिमाह) (Miscellaneous Expenses (Per Month)):

 

इस इकाई में निम्नानुसार विविध खर्च होना भी अनुमानित है:

11. इकाई की लाभप्रदता (Profitability of the Unit):

इस इकाई में उत्पादित किये जाने वाले 50 टन उत्पादों (साबुन की बट्टी, बार, चिप्स तथा पाउडर) की 17.50 रुपये किलोग्राम की दर से बिक्री से वर्ष में कुल 787500 रुपये की प्राप्तियां होगी तथा वार्षिक/मासिक लाभ की मात्रा निम्नानुसार रहेगी-

 

 

12. मैसर्स कच्चे माल के प्रदार्यकर्ता (M/s. Raw Material Provider):

कच्चा माल जैसे अखाद्य तेल, नमक, सोप स्टोन आदि स्थानीय विक्रेताओं से प्राप्त किया जा सकता है ।