ध्रुवस्वामिनी । Biography of Dhruvswamini in Hindi Language!

1. प्रस्तावना ।

2. ध्रुवस्वामिनी का आदर्श चरित्र ।

3. उपसंहार ।

1. प्रस्तावना:

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ध्रुवस्वामिनी का चरित्र एक आदर्श भारतीय नारी का चरित्र है । उसमें आत्मसम्मान, देशाभिमान तथा नारी-सुलभ भावनाओं का अदभुत सम्मिश्रण मिलता है । एक कायर, मूर्ख, अदूरदर्शी पति रामगुप्त के बजाय वह चन्द्रगुप्त की पत्नी बनना ज्यादा उपयुक्त समझती है ।

तत्कालीन समय में रामगुप्त की विवाहिता पत्नी होकर वीर, साहसी चन्द्रगुप्त के प्रति उसकी प्रेम-भावना और बाद में उससे विवाह करना एक क्रान्तिकारी कदम था ।

2. ध्रुवस्वामिनी का आदर्श चरित्र:

ध्रुवस्वामिनी स्कन्दगुप्त के ज्येष्ठ पुत्र रामगुप्त की अत्यन्त सुन्दर, सुशील, वीर व साहसी पत्नी थी । उसका पति रामगुप्त उसकी तुलना में अत्यन्त कायर, विलासी, मद्यप, दुष्चरित्र, अयोग्य व्यक्ति था । यद्यपि ज्येष्ठ होने के कारण वह गुप्त साम्राज्य का अधिपति था । जब राज्य पर शकों का आक्रमण हुआ, तो रामगुप्त ने युद्ध के बजाय शक नरेश को अपनी पत्नी ध्रुवस्वामिनी को सौंपने का प्रस्ताव रखा ।

ध्रुवस्वामिनी ने अपने सतीत्व तथा मर्यादा की रक्षा करने हेतु रामगुप्त के कनिष्ठ भ्राता चन्द्रगुप्त की सहायता से शकों का मुकाबला किया, जिसमें शकों को पराजय का मुंह देखना पड़ा । रामगुप्त ने चन्द्रगुप्त को ध्रुवस्वामिनी की सहायता करते देखकर उसे एक दिन चाकू से मारना चाहा, तभी आत्मरक्षा में चन्द्रगुप्त ने रामगुप्त का तलवार से वध कर दिया ।

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विधवा ध्रुवस्वामिनी ने साहसी, वीर चन्द्रगुप्त से विवाह कर लिया । कालान्तर में उसे कुमार गुप्त तथा गोविन्द गुप्त नामक दो पुत्र हुए । ध्रुवस्वामिनी ने जिस वीरता व साहस के साथ गुप्त साम्राज्य की शकों से रक्षा की थी और अपने कायर पति का त्याग किया, निश्चय ही उसका यह कार्य तत्कालीन समय में अपने समय से कहीं आगे था ।

3. उपसंहार:

ध्रुवस्वामिनी को इतिहास में ध्रुव देवी के नाम से भी जाना जाता है । वह लिच्छवि कुमारी थी । एक नारी के आत्मसम्मान की रक्षा तभी हो सकती है, जब उसमें आत्मबल हो । यही आत्मबल ध्रुवस्वामिनी को अपने अयोग्य पति रामगुप्त से मुक्ति दिलाने में भी सफल हुआ । जो पति अपनी पत्नी तथा देश के आत्मसम्मान की रक्षा करने के लिए युद्ध करने से डरता हो, वह कायर, देशद्रोही ही हो सकता है ।

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