Read this article in Hindi to learn about the types and precautions taken while using vice.

वाइस के प्रकार (Types of Vice):

प्रायः निम्नलिखित प्रकार की बाइसें प्रयोग में लाई जाती हैं:

1. बेंच वाइस:

इसको पैरेलल जी वाइस भी कहते हैं जिसको प्रायः बेंच पर फिट किया जाता है । इसका साइज इसके जॉ की चौडाई से लिया जाता है । भारतीय स्टैण्डर्ड (B.I.S) के अनुसार यह प्रायः 75 से 150 मि.मी. तक पाई जाती है ।

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75 मि.मी. वाली वाइस छोटे कार्यों के लिए 100 व 125 मि.मी. वाली मध्यम कार्यों के लिए और 150 मि.मी. वाली वाइस बडे कार्यों के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं । बेंच वाइस का प्रयोग उन कार्यों को अच्छी तरह से बांधने के लिए किया जाता है जिन पर प्रायः फाइलिंग, चिपिंग, हेक्साइंग और अन्य हैंड आपरेशन करने की आवश्यकता होती है ।

बनावट:

इसके प्रायः निम्नलिखित पार्टस होते हैं:

बेंच वाइस को फिक्स करते समय ध्यान रखने योग्य संकेत:

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i. फर्श से वाइस के ऊपरी फेस तक ऊंचाई लगभग 1 मीटर होनी चाहिए या यह कार्य करने वाले श्रमिक की कुहनी के बराबर होनी चाहिए ।

ii. बेंच वाइस को सही आश्रय और स्थिरता प्रदान करने के लिए बेंच की एक टांग के ऊपर उपयुक्त बोल्टों, नटों व वाशरों के साथ फिक्स करना चाहिए ।

iii. यह लेवल में होनी चाहिए । और इसके जाम वर्क बेंच और फर्श के समानान्तर होने चाहिए । यदि वाइस लेवल में नहीं होगी तो मेटीरियल एक साइड से अधिक करेगा ।

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iv. इसका फिक्स्ड जॉ वर्क बेंच के सिरे से थोडा बाहर की ओर होना चाहिए जिससे लंबे वर्कपीस को लम्बवत पकडा जा सकता है ।

v. वाइस को सुदृढ़ता से फिक्स करना चाहिए । यदि इसे सहता से फिक्स न किया जाए तो वह कंपन करेगी जिससे जॉब की सरफेस फिनिश और परिशुद्धता प्रभावित हो सकती है ।

बेंच वाइस की ऊँचाई का समायोजन:

(a) बेंच वाइस की ऊँचाई तब सही होती है जब बेंच वाइस का ऊपरी फेस कार्य करने वाले श्रमिक की कुहनी के बराबर होता है जबकि श्रमिक बाजु को मोड़कर अंगुलियों को छुट्टी से लगा कर खड़ा हो ।

(b) निम्नलिखित में से किसी एक का प्रयोग करके बेंच वाइस की ऊंचाई को समायोजित किया जा सकता है:

(क) वाइस के बेस के नीचे लकडी की पैकिंग लगाकर ।

(ख) अच्छी तरह से डिजाइन किया हुआ वाइस फिक्सर प्रयोग करके ।

(ग) लकडी का प्लेटफार्म लगाकर ।

वाइस की ऊँचाई के प्रभाव:

बहुत महत्व होता है क्योंकि इससे करीगर के द्वारा की जाने वाली कार्यक्रिया तथा उत्पादकता प्रभावित होती है । यदि बेंच वाइस को अधिक ऊँचा फिक्स किया गया है तो जॉब जैसा टेपर बनेगा । यदि वाइस को बिल्कुल सहीं ऊँचाई पर फिक्स किया गया तो जॉब बिल्कुल सही समतल बनेगा । यदि वाइस की ऊंचाई कम है तो जॉब जैसा टेपर बनेगा ।

2. पाइप वाइस:

इस प्रकार की वाइस की बनावट में एक बॉडी, मुवेबल जॉ, फिक्सड जॉ, स्क्रू स्पिंडल और हैंडल होते हैं । इस वाइस के जॉ प्राय: ‘वी’ आकार में बने होते हैं । इसका मुवेबल जॉ लम्बरूप खुलता है । इस प्रकार की वाइस में गोल आकार के जॉब आसानी से बांधे जा सकते क्योंकि गोल आकार के जॉब को इसमें बांधने से चार स्थानों से पकड़ होने के कारण वह घूमने नहीं पाता है ।

इस वाइस का अधिकतर प्रयोग पाइप फिटिंग करते समय और बिजली की वर्कशाप में किया जाता है । इसके जॉ के बीच में अधिक-से अधिक जितने व्यास का जॉब बांधा जा सकता है, उसके अनुसार इसका साइज लिया जाता है ।

गोल आकार के जॉब को इसमें बांधने से चार स्थानों से पकड़ होने के कारण वह घूमने नहीं पाता है । इस वाइस का अधिकतर प्रयोग पाइप फिटिंग करते समय और बिजली की वर्कशाप में किया जाता है । इसके जॉ के बीच में अधिक-से अधिक जितने व्यास का जॉब बांधा जा सकता है, उसके अनुसार इसका साइज लिया जाता है ।

3. लैग वाइस:

इस प्रकार की वाइस की एक टांग लंबी होती है । इसको प्रायः लकड़ी के मजबूत लट्ठ या बेंच पर फिट किया जाता है । इसकी लंबी टांग को जमीन में गाड़ दिया जाता है । इस वाइस के जॉ समानान्तर न खुलकर गोलाई में खुलते हैं । इसका अधिकतर प्रयोग लोहारगिरी शॉप में किया जाता है जिससे इस पर गर्म जॉब को बांधकर फोर्जिंग, बेंडिंग इत्यादि कार्य क्रियायें की जा सकें ।

इस वाइस की बॉडी रॉट-ऑयरन या माइल्ड स्टील से बनाई जाती है । इसका साइज इसके जॉ की चौड़ाई से लिया जाता है । प्रायः इस वाइस में जॉ प्लेटें वाइस में अलग-अलग स्क्रू से न जोड़कर साथ में कास्ट किये रहती हैं । परंतु कुछ कंपनियां अलग-अलग स्क्रू के द्वारा जोड़ने वाली जॉ प्लेटें भी लगाती हैं ।

4. हैंड वाइस:

जैसा कि नाम से सिद्ध है यह वाइस हाथ में पकड़ कर प्रयोग में लाई जाती है । इसके जॉ समानान्तर न खुलकर गोलाई में खुलते हैं । इसके जॉ को खोलने या बंद करने के लिए एक विंग नट प्रयोग में लाया जाता है ।

इसके दोनों जॉ के बीच में एक चिपटे स्प्रिंग की पत्ती लगी रहती है जो कि इसके जॉ को अपने साथ खुलने में सहायता करती है । वर्कशाप में इसका प्रयोग छोटे-छोटे कार्यों को पकड़ने के लिये किया जाता है । यह प्रायः माइल्ड से बनाई जाती है । इसका साइज इसके जॉ की चौड़ाई से लिया जाता है ।

5. पिन वाइस:

इस प्रकार की वाइस छोटे आकार की होती है जिसकी बनावट में एक ओर हैंडल होता है और दूसरी ओर चॅक । इसके चक को घुमाकर इसमें छोटे-छोटे जॉब और पिन इत्यादि को आसानी से पकड़ा जा सकता है ।

इसका अधिकतर प्रयोग घड़ी साज और इन्स्टूमेंट मैकेनिक के द्वारा किया जाता है । यह प्रायः स्टील से बनाई जाती है । इस वाइस में अधिक-से-अधिक जितने साइज का जॉब बांधा जा सकता है उसके अनुसार इसका साइज लिया जाता है ।

6. टूल मेकर्स वाइस:

इस प्रकार की वाइस बहुत ही छोटे साइज की समानान्तर जॉ वाली वाइस होती है । यह वाइस प्रायः टूल मेकर्स के द्वारा प्रयोग में लाई जाती है जिससे वे इसमें छोटे-छोटे जॉब पकड़ कर आपरेशन करते है । यह प्रायः स्टील से बनाई जाती है । इसका साइज इसके जॉ की चौडाई से लिया जाता है ।

7. प्लेन मशीन वाइस:

इस प्रकार की वाइस के जॉ भी समानान्तर खुलते हैं । इस वाइस का बेस अच्छी तरह से मशीनिंग किया रहता है । जिससे इसको मशीन के टेबल पर ‘टी’ बोल्ट की सहायता से आसानी फिट किया जा सकता है । ‘टी’ बोल्ट मशीन के टेबल पर बने ‘टी’ स्लाट में बैठ जाता है और बोल्ट को मशीन वाइस के बेस पर सुराख या खांचे में बैठा कर नट के द्वारा कस दिया जाता है । इस प्रकार की वाइस का अधिकतर प्रयोग मशीनिंग आपरेशन जैसे ड़िलिंग, मिलिंग, शेपिंग इत्यादि करते समय जॉब को पकड़ने के लिये किया जाता है । इसका साइज इसके जॉ की चौड़ाई से लिया जाता है ।

8. स्विवल बेस वाइस:

इस प्रकार की वाइस के जॉ समानान्तर खुलते हैं । इस वाइस में बेस प्लेट और फिक्सड जॉ अलग-अलग होते हैं । बेस प्लेट के सेंटर में एक पिन फिट रहती है जिसके साथ फिक्स्ड जॉ के धरातल में बने सुराख को मिलाकर फिट कर देते हैं । इस फिक्स्ड जाँ को बेस प्लेट पर 360 के कोण में घुमाया जा सकता है ।

फिक्स्ड जाँ के बेस के साथ एक लीवर फिट रहता है जिसकी सहायता से वाइस को किसी भी कोण में सेट कर सकते हैं । इस प्रकार वाइस प्रायः फिटर शॉप या मशीन में प्रयोग में लाई जाती है । इसका साइज इसके जॉ की चौड़ाई से लिया जाता है ।

9. क्विक रिलीजिंग वाइस:

इस प्रकार की वाइस के बास समानान्तर खुलते हैं । इस वाइस में एक हाफ नट लगा रहता है जिसको स्पिण्डल के साथ स्प्रिंग लीवर की सहायता से संलग्न और अलग किया जा सकता है । लीवर दबाने से हाफ नट अलग हो जायेगा और स्पिण्डल को अंदर दबाया जा सकता है और बाहर भी आसानी से खींचा जा सकता है और जहां पर वाइस को सैट करना हो लीवर की सहायता से सैट कर दिया जाता है । इस प्रकार की वाइस अधिकतर बहु-उत्पादन के लिए प्रयोग में लाई जाती है ।

10. यूनिवर्सल मशीन वाइस:

इस प्रकार की मशीन वाइस की बनावट इस तरह से बनाई जाती है कि इसको स्विवल बेस मशीन की तरह बेस के समतल चारों ओर घुमाया जा सकता है तथा लंब रूप में भी इसको कोण में सैट किया जा सकता है । इस प्रकार की वाइस का अधिकतर प्रयोग टूल एंड डाई मेकरों के द्वारा किया जाता है जिससे जॉब को बिना खोले उसकी दिशा बदल कर जॉब पर मशीनिंग आपरेशन किये जा सकते हैं ।

वाइस के उपयोग में सावधानियां (Precautions Taken while Using Vice):

i. कार्य करने से पहले वाइस को ब्रुश से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिये ओर कार्य करने के बाद भी इसको अच्छी तरह से साफ करना आवश्यक है ।

ii. वाइस के स्लाइड करने वाले भाग पर तेल लगाते रहना चाहिये ।

iii. वाइस के स्पिण्डल व बाक्स नट पर तेल या ग्रीस लगाते रहना चाहिये ।

iv. जॉब को वाइस में बांधते समय हैंडल पर हथौडे की चोट नहीं लगानी चाहिये ।

v. वाइस में जॉब को आवश्यकता से अधिक नहीं कसना चाहिये और न ही ढीला रखना चाहिये ।

vi. फिनिश जॉब को वाइस में बांधते समय नर्म धातु के वाइस क्लेम्पों का प्रयोग करना चाहिये ।

vii. जॉब को वाइस में बांधते समय इस बात का ध्यान देना चाहिए कि जॉब जॉ से इतना ही बाहर होना चाहिए कि कार्य करते समय टूल वाइस से न टकराने पाये । यदि जॉब अधिक बाहर रखकर बांधेंगे तो कार्य करते समय वह किटकिटायेगा ।

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