महाद्वीपीय बहाव सिद्धांत | Continental Drift Theory in Hindi.

प्रसिद्ध जर्मन विद्वान वेगनर ने 1920 के दशक में यह सिद्धांत प्रस्तुत किया । उन्होंने पाया कि वर्तमान महाद्वीपों को मिलाकर एक भौगोलिक एकरूपता दी जा सकती है । उन्होंने इसे साम्य रूपता स्थापना (Jig-Saw-Fit) कहा । उनके अनुसार, कार्बोनीफेरस युग में पृथ्वी के सभी स्थलखंड आपस में जुड़े हुए थे ।

इस वृहत महाद्वीप को उन्होंने ‘पैंजिया’ नाम दिया । इसके चारों ओर एक वृहत महासागर का विस्तार था जिसे ‘पैंथालासा’ कहा गया । अंतिम-ट्रियासिक युग में ‘पैंजिया’ का विभाजन प्रारम्भ हुआ एवं इसका एक भाग उत्तर की ओर तथा दूसरा भाग दक्षिण की ओर प्रवाहित हुआ । उत्तरी भाग लॉरेंशिया (अंगारालैंड) तथा दक्षिणी भाग गोंडवानालैंड कहलाया ।

इन दोनों स्थलीय भागों के बीच एक उथला व संकीर्ण महासागर खुला जिसे ‘टेथिस सागर’ कहते हैं । लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पूर्व अंतिम-क्रिटेशियस युग में गोंडवानालैंड में विभंजन के फलस्वरूप दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, प्रायद्वीपीय भारत, मेडागास्कर तथा आस्ट्रेलिया का निर्माण हुआ । प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर की ओर प्रवाहित होने के कारण हिन्द महासागर खुला ।

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अंगारालैंड टूटकर उ. अमेरिका, यूरोप तथा एशिया बना । दोनों अमेरिका के पश्चिम की ओर प्रवाहित होने के कारण अटलांटिक महासागर निर्मित हुआ । इसी विस्थापन के कारण उत्तर तथा दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी भाग में रॉकी और एंडीज पर्वत का निर्माण हुआ ।

इसी तरह अफ्रीका तथा प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर की ओर विस्थापन के कारण हिमालय तथा अन्य अल्पाइन पर्वतों का निर्माण हुआ । पैंजिया तथा पैंथालासा का अवशिष्ट भाग आज क्रमशः अंटार्कटिका तथा प्रशान्त महासागर के रूप में मौजूद है । वेगनर के अनुसार पैंजिया के टूटने का कारण गुरुत्व बल, प्लवनशीलता (Force of Buoyancy) तथा ज्वारीय बल (Tidal Force) है ।

वेगनर के द्वारा प्रतिपादित महाद्वीपीय विस्थापन के संबंध में अनेक प्रमाण हैं । भौगोलिक साम्यरूपता (Jig-Saw-Fit), ग्लोसोप्टिरस वनस्पतियों के अवशेषों का भारत, मेडागास्कर, दक्षिणी अफ्रीका, आस्ट्रेलिया व अंटार्कटिका के अलग-अलग जलवायु प्रदेशों में पाया जाना, छोटानागपुर के पठार में हिमोढ़ों का मिलना, डायनासोर व लेमिंग मछली के जीवाश्मों का कनाडा में पाया जाना, ब्राजील के डिलामेयर पर्वत व अंगोला के प्री-कैम्ब्रियन पर्वतों का एक सीध में व एक काल में निर्मित होना, एक ही प्रकार के भूगर्भिक संरचना व उससे संबद्ध खनिजों का भिन्न-भिन्न महाद्वीपों में पाया जाना वेगनर के सिद्धांत की मौलिकता का प्रमाण है ।

यद्यपि उनके द्वारा महाद्वीपीय विस्थापन हेतु विवेचित बल अपर्याप्त रहे हैं परंतु उनके द्वारा दिए गए विभिन्न प्रमाण 1960 के दशक में प्लेट विवर्तनिकी के सिद्धांत के विकास का मार्ग प्रशस्त करने में सहायक रहा है ।

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