“महिलाओं के लिए वोटिंग अधिकार” पर सुसान बी एंथनी का भाषण । Speech of Susan B Anthony on “Voting Rights for Women” in Hindi Language!

जब महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था, तब सुसान बी॰ एंथनि ने सन् 1872 के राष्ट्रपति के चुनाव में वोट डालकर विरोध प्रकट किया । उन्हें कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया

गया ।

इस पर सुसान ने निम्नलिखित भाषण देकर अपने विचार व्यक्त किये :

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मित्रो और साथी नागरिको ! मैं आज रात्रि आपके समक्ष इस अभियोग के साथ खड़ी हूं कि मैंने पिछले राष्ट्रपति के चुनाव में वोट देने का अधिकार न होते हुए भी वोट देने का कथित गैर-कानूनी कार्य किया है । आज शाम मेरा कार्य आपके समक्ष यह प्रमाणित करना है कि मैंने कोई गुनाह नहीं किया । मैंने तो केवल नागरिक होने के नाते अपने अधिकार का प्रयोग किया है ।

यह अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के हर नागरिक को उसके राष्ट्रीय संविधान ने प्रदान किया है, जिसे नकारने का अधिकार किसी राज्य को नहीं है ।

संघीय संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है:

‘हम संयुक्त राज्य के लोग एक अधिक परिपूर्ण संघ बनाने न्याय की स्थापना करने आन्तरिक शान्ति सुनिश्चित करने साझी सुरक्षा व्यवस्था बनाने व्यापक कल्याण के लिए अपने और अपनी भावी सन्तान के लिए आजादी का वरदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए यह संविधान स्थापित व नियोजित करते हैं ।’

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हम लोगों ने श्वेत पुरुष नागरिकों ने नहीं नागारिक पुरुषों ने भी नहीं अपितु हम सब लोगों ने संघ की स्थापना की थी । हमने संघ बनाया स्वाधीनता के बरदान  के लिए ही नहीं, अपितु उनको सुरक्षा प्रदान करने के लिए । न केवल हममें से आधों को या आधी सन्तान को अपितु सभी लोगों को स्त्री व पुरुष दोनों को ।

महिलाओं से उनको मिले आजादी के वरदान की बात करना सीधा-सीधा व्यंग्य है, जब तक उन्हें लोकतान्त्रिक सरकार द्वारा सुरक्षा पाने के एकमात्र साधन वोट देने के, अधिकार से वंचित रखा जाता है । किसी भी राज्य के लिए लिंग को पात्रता बनाना जिससे आधी जनसंख्या मताधिकार से वंचित हो जाये, एक अपयशपूर्ण विधेयक या पश्चदर्शी कानून है, इसलिए यह देश के सर्वोच्च कानून का उल्लंघन है ।

इसके द्वारा महिलाओं और उनकी स्त्री-सन्तान को स्वतन्त्रता के वरदान से हमेशा के लिए वंचित रखा जा रहा है । उनके लिए इस सरकार के पास शासितों की सहमति से दिये गये समुचित अधिकार नहीं हैं । उनके लिए यह सरकार प्रजातन्त्र नहीं  आई । यह गणतन्त्र नहीं । यह एक कुत्सित अभिजात-तन्त्र है । यह एक लिंग आधारित घृणित कुल-तन्त्र है ।

यह धरतीपर स्थापित सबसे अधिक घ्रूणित अभिजात- तन्त्र है । यह धन का कुल-तन्त्र है, जिसमें धनी गरीबों पर हुकुमत करते हैं । यह अध्यापकों का कुल-तन्त्र है, जिसमें शिक्षित-अशिक्षितों पर शासन करते हैं । यह तो नस्ल का कुल-तन्त्र भी है ।

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किसी सैक्सन का अफ्रीकियों पर शासन करना तो बर्दाश्त किया जा सकता है, लेकिन यह लिंग आधारित कुल-तन्त्र जिसमें प्रत्येक घर में पिता भाई पति और पुत्र-माताओं बहिनों पत्नियों और पुत्रियों पर शासन करते हैं, जिसमें प्रत्येक पुरुष शासक और प्रत्येक स्त्री प्रजा है, राष्ट्र के हर घर में लड़ाई-झगड़े मतभेद और विद्रोह फैलाता है ।

वेबस्टर वॉरसेस्टर और बोवियर-इन सभी कोशों में नागरिक की परिभाषा उस व्यक्ति के रूप में की है, जो अमेरिका का निवासी है और यहां मत देने तथा पद ग्रहण करने का अधिकार रखता है । अब एक ही सवाल शेष रह जाता है, क्या महिलाएं भी व्यक्ति हैं ? मेरे विचार से हमारे विरोधियों में से किसी में भी यह करने का दु:साहस न होगा कि वे व्यक्ति नहीं हैं, तो फिर व्यक्ति होने के नाते महिलाएं भी नागरिक

हैं । ऐसे में किसी भी राज्य को कोई ऐसा कानून बनाने या पुराना कानून लागू करने का अधिकार नहीं है, जो उनके इस विशेषाधिकार या निरापदता को प्रतिबन्धित करे । अत: राज्यों के संविधान या कानून में महिलाओं के साथ किया जाने वाला कोई भी भेदभाव उसी तरह अमान्य और शून्य है, जैसा अश्वेतों के साथ भेदभाव है ।

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