Read this article in Hindi to learn about:- 1. प्रशिक्षण  का अर्थ और परिभाषा (Meaning and Definition of Training) 2. प्रशिक्षण के उद्देश्य (Objectives of the Training) 3. प्रकार (Types) and Other Details.

प्रशिक्षण  का अर्थ और परिभाषा (Meaning and Definition of Training):

प्रशिक्षण से आशय है, किसी विशेष कौशल का कार्मिक में विकास करना । मैण्डेल के शब्दों में- ”प्रशिक्षण का अर्थ है कार्य का अभिनवीकरण, वर्तमान ज्ञान और कुशलता का विकास तथा भावी उत्तरदायित्वों के लिए तैयारी ।”  विलियम टोर्पे- ”यह कार्मिकों में कार्यकुशलता, आदत या व्यवहार विकसित करने की प्रक्रिया है, जिसके दो उद्देश्य है वर्तमान कार्य की प्रभावशीलता में वृद्धि तथा भावी स्थिति के लिए तैयारी ।”

शिक्षण और प्रशिक्षण में अंतर:

दोनों का उद्देश्य एक है व्यक्ति की योग्यता में वृद्धि, परंतु उनमें अंतर है । शिक्षण का उद्देश्य व्यापक है जो व्यक्ति की सामान्य योग्यताओं से और उसके संपूर्ण विकास से संबंधित है । यह उसके जन्म से ही प्रारंभ हो जाता है जबकि प्रशिक्षण संकुचित है तथा एक विशिष्ट क्रिया है जिसमें व्यक्ति के व्यवसाय से संबंधित कौशल बढ़ाने पर जोर दिया जाता है ।

प्रशिक्षण के उद्देश्य (Objectives of the Training):

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प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कार्मिकों की कार्य प्रणाली में सुधार करना है । लेकिन यह संकुचित है । इसका व्यापक उद्देश्य कार्मिकों के सम्पूर्ण विकास से संबंधित हैं, ताकि न सिर्फ वे अपना कार्य अच्छे ढंग से संपादित कर सके, अपितु उनका उत्साह और मनोबल भी उच्च बना रहें । लोक सेवकों को शासकीय कार्यप्रणाली से परिचित कराने और उनके कर्तव्यों को अधिक कुशलता से करने हेतु प्रशिक्षण दिया जाता है ।

ऐशेटन समिति, लंदन (1944) ने प्रशिक्षण के पांच प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार बताए थे:

1. ऐसे लोकसेवकों का निर्माण जो कार्य में निश्चित स्पष्टता ला सके ।

2. भविष्य में सौंपे जाने वाले कार्य कर सके ।

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3. वर्तमान दायित्वों के साथ अतिरिक्त दायित्वों का निर्वाह कर सकें ।

4. उनका यंत्रीकरण रोका जा सके ।

5. उनके नैष्टिक कार्यों को समाप्त करके उनका मनोबल बढ़ाया जा सके ।

इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण के उद्देश्य होते हैं- लोकसेवकों में टीम भावना का विकास करना, दृष्टिकोण व्यापक और मानवीय बनाना, जटिल कार्यों को संपादन के योग्य बनाना, लोक सेवकों का चरित्र निर्माण करना, उनकी योग्यता में वृद्धि करना तथा उनके आचरण में सुधार करना इत्यादि । स्पष्ट है कि प्रशिक्षण मात्र कार्य की तकनीकों का प्रशिक्षण नहीं हैं अपितु व्यक्तित्व का विकास भी है ।

प्रशिक्षण के प्रकार (Types of Training):

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i. अनौपचारिक प्रशिक्षण:

अनौपचारिक प्रशिक्षण में व्यक्ति को सिखाया नहीं जाता अपितु वह स्वयं सीखता है । यह परपरागत प्रशिक्षण है । ”गलती करो और सिखो” (Learning by Trial & Error) इसका मूलमंत्र है । टिंकर के अनुसार यह कठोर मार्ग है । व्यक्तिगत संपर्क भी अनौपचारिक रूप से व्यक्ति को सिखा सकता है । इसे कार्य पर प्रशिक्षण (On the Job Training) भी कहते है । ए.डी. गोरवाला- “एक अच्छे कलेक्टर का घर नवोदित आई ए एस. (सहायक कलेक्टर) के लिए उसका दूसरा मकान होता है ।”

ii. औपचारिक प्रशिक्षण:

औपचारिक प्रशिक्षण से आशय है कार्य या किसी प्रणाली के बारे में प्रशिक्षण केंद्रों पर योजनाबद्ध प्रशिक्षण दिया जाना । इसका उद्देश्य होता है प्रशासनिक गतिविधियों से अधिक से अधिक परिचित कराना । प्रवेश पूर्व प्रशिक्षण, पुनरावलोकन प्रशिक्षण, विश्वविद्यालय शिक्षा आदि औपचारिक प्रशिक्षण ही हैं ।

प्रशिक्षण की तकनीकें (विधियां) (Techniques of Training):

अमेरिका ने अनेक प्रशिक्षण तकनीकें खोजी हैं जो अत्यन्त महत्वपूर्ण है ।

जैसे:

1. व्याख्यान तकनीक (Lecture’s Technique):

प्रशिक्षण के इस सबसे प्राचीन और व्यापक रूप से इस्तेमाल तरीके में प्रशिक्षुओं को वरिष्ट और अनुभवी मार्गदर्शक कार्य के विविध पक्षों पर व्याख्यान देते हैं ।

2. सिंडीकेट प्रशिक्षण (Syndicate Training):

इंग्लैंड के एडमिस्ट्रेटिव्ह स्टाफ कालेज (हेनले-ओन-थेम्स) में जन्मी इस पद्धति में प्रशिक्षु समूह के सामान्य मार्गदर्शन में विषय की गहरायी तक जाता है । यह सहभागी प्रशिक्षण पद्धति है । इसके उद्देश्य के आधार पर दो प्रकार होते हैं, जानकारी संग्रह और समस्या-निदानात्मक ।

3. प्रकरण अध्ययन पद्धति (Case Study Method):

इसमें विषय या कार्य का गहरा, अनुसंधान परक अध्ययन अनुभवी, मार्गदर्शकों के निर्देशन में प्रशिक्षु सामूहिक रूप से करते है । इससे कार्मिकों की तार्किक समझ और क्षमता विकसित होती है ।

4. घटना पद्धति (Incidence Method):

प्रशिक्षुओं को घटना या समस्या से संबंधित तथ्य उपलब्ध कराकर उसका समाधान खोजने को कहा जाता है । उनसे अपने-अपने समाधानों को सही ठहराने को कहा जाता है । इससे उनमें निर्णय लेने की तार्किक क्षमता का विकास होता है ।

5. भूमिका अभिनय (Role Playing):

यह कार्यप्रदर्शन द्वारा प्रशिक्षण है । वास्तविक कार्य अवस्था में कार्मिक को अपने कार्य से संबंधित भूमिका का निर्वाह करना होता है । इस पर बाद में समूह चर्चा होती है ।

6. सिम्युलेशन (Simulation):

प्रशिक्षण की इस आधुनिक पद्धति में कृत्रिम वातावरण में या कृत्रिम पदार्थों पर कार्य करवाया जाता है । जैसे कम्प्यूटर पर कार्य-मॉडल बनाकर उनके बारे में अवगत कराना ।

7. द्वारकोष्ठ प्रशिक्षण वस्तुत:

उद्योगों में दिया जाने वाला प्रशिक्षण है । इसमें एक अलग प्रशिक्षण शाला होती है । जहां कारखाने जैसा कार्य और वातावरण उत्पन्न किया जाता है ।

8. टी ग्रुप प्रशिक्षण (T-Group Training):

संवेदनशील या प्रयोगशाला प्रशिक्षण के नाम से जाना जाता है । 1940 में कर्टन लेवी और लिपिट ने इसे ईजाद किया था । क्रिस आइगारिस ने इसे पुन: विकसित किया । इसमें उपस्थित व्यक्तियों के मध्य परस्पर विचारों, मूल्यों, भावनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है ।

9. प्रकोष्ठ प्रशिक्षण या वेस्टीबुल प्रशिक्षण (Vestibule Training):

इसमें शृंखलाबद्ध निर्देश (Lectures) दिये जाते हैं । इसमें सिद्धान्त, व्यवहार दोनों तरह का प्रशिक्षण शामिल है । भारत में वन सेवा के वरिष्ट अधिकारियों को यह प्रशिक्षण दिया जाता है ।

10. इनबास्केट प्रशिक्षण (Internship Training):

में प्रशिक्षार्थी को कार्यभार की स्थिति में रखा जाता है । उसके पास सीमित सूचनाएं होती है, जिसके आधार पर उसे निर्णय करना होता है, वस्तुत: यह मानसिक योग्यता के विकास हेतु प्रशिक्षण की तकनीक है ।

11. इन्टर्नशिप प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थी को विशेषज्ञों द्वारा काम की बारीकियों से परिचित करवाया जाता है ।

अन्य पद्धतियां (Other Methods):

1. समस्या समाधान,

2. चित्रपट चर्चा,

3. मैनेजमेंट गैम्स,

4. प्रोग्राम लर्निंग,

5. ट्रांसैक्शनल एनालाइसिस,

6. एचीवमेंट-मोटीवेशन वर्कशॉप,

7. कम्प्यूटर से प्रशिक्षण,

8. ब्रेन स्टोर्मिग ।

प्रशिक्षण के लाभ दोष (Merits and Demerits of Training):

1. कार्यकुशलता में वृद्धि ।

2. प्रशिक्षण की मात्रा व व्यय में कमी ।

3. कार्मिकों की अनुपस्थिति में कमी ।

4. कार्मिकों के मनोबल का विकास ।

5. कार्मिकों की पदोन्नति के बढ़े हुए अवसर ।

प्रशिक्षण के दोष:

1. प्रशिक्षण पर धन व समय का व्यय ।

2. नियमित कार्य में बाधा ।