मानव निवेश की संरचना | Read this article in Hindi to learn about the composition of human investment.

1. स्वास्थ्य एवं पोषण (Health and Nutrition):

स्वस्थ जनशक्ति किसी अर्थव्यवस्था के विकास का महान पहलू है क्योंकि इससे प्रति व्यक्ति उत्पादन बढ़ता है । परन्तु स्वास्थ्य और अल्प-पोषण जन शक्ति की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव डालते हैं ।

अल्पविकसित देशों में अल्पाहार और अल्प-पोषण के परिणामस्वरूप जनशक्ति की गुणवत्ता दुर्बल हो जाती है । लोगों के आहार में प्रोटीन तथा विटामिनों की कमी होती है और चिकित्सक सुविधाओं के अभाव के कारण लोगों में विभिन्न रोगों का फैलाव एक सामान्य सी बात है ।

अल्पविकसित देशों में जनशक्ति की गुणवत्ता सुधारने का सर्वोत्तम ढंग है- लोगों को पर्याप्त और पोषक आहार उपलब्ध करवाना, सफाई की बेहतर सुविधाएं तथा चिकित्सक सुविधाएं उपलब्ध करवाना जिससे लोगों की दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि होगी ।

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इसलिये, ”भूमि प्रयोग की नई प्रणाली आरम्भ करने के लिये और कृषि की नई विधियां अपनाने के लिये, संचार के नये साधन विकसित करने के लिये, औद्योगिकीकरण को आगे बढ़ाने के लिये और शैक्षिक व्यवस्था के निर्माण के लिये है । बढ़ती हुई सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिये मानवीय शक्ति की आवश्यकता है । अन्य शब्दों में, नव प्रवर्तन और स्थिर अथवा परम्परावादी समाज से परिवर्तन की प्रक्रिया के लिये युक्ति संगत मानवीय पूंजी की पर्याप्त मात्रा में आवश्यकता होती है ।”

2. शिक्षा और प्रशिक्षण (Education and Training):

शिक्षा में किये गये निवेश से आर्थिक विकास का गतिवर्द्धन हुआ है । एडवर्ड एफ. डोनासन (Edward F. Donason) ने अनुमान लगाया कि अमरीका में शिक्षा में निवेश ने कुल वास्तविक आय की वृद्धि में 23 प्रतिशत के योगदान से शुद्ध राष्ट्रीय आय की वृद्धि में 42% का योगदान किया ।

जनशक्ति की प्रभावी उपयोगिता शिक्षा, प्रशिक्षण और लोगों के औद्योगिक अनुभव पर निर्भर करती है । शिक्षा में किया गया निवेश श्रम शक्ति की उत्पादकता को बढ़ाता है । उन देशों में अधिक उन्नति होगी जहां शिक्षा का अधिक विस्तार है तथा जहां यह प्रायोगिक दृष्टिकोण को उत्साहित करती है ।

इसके अतिरिक्त यह देखा गया है कि अल्पविकसित देश अपने विकास के लिये भौतिक पूंजी का आयात करते हैं परन्तु विवेचनात्मक निपुणताओं के अभाव में वे इसके उचित उपयोग में असफल रहते हैं । अत: तकनीकी परिवर्तन आर्थिक विकास का मूल निर्धारक है ।

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सोलो ने अनुमान लगाया कि तकनीकी परिवर्तन श्रम शक्ति और पूंजी संग्रह में विकास मिलने के बाद अमरीका की अर्थव्यवस्था के लगभग 2/3 भाग के विकास के लिये उत्तरदायी है । अत: शिक्षा में विकास तकनीकी परिवर्तन की पूर्व शर्त है ।

शिक्षा में पर्याप्त निवेश के अभाव के कारण अल्पविकसित देशों में अधिकांश लोग निरक्षर रह जाते हैं जबकि विकसित देशों की जनसंख्या साक्षर होती है । इससे निपटने के लिये अल्पविकसित देशों को चाहिये कि उन्नत देशों की भांति आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करें ।

अल्प विकसित देशों में शिक्षा का विस्तार प्राइमरी, सैकण्डरी और उच्च शिक्षा स्तर पर अवश्य होना चाहिये । सैकण्डरी शिक्षा में विस्तार अल्पविकसित देशों के आर्थिक विकास में बहुत योगदान कर सकता है ।

उच्च शिक्षा भी बहुत महत्व रखती है क्योंकि यह उच्च प्रशिक्षित और तकनीकी ज्ञान वाली श्रम शक्ति, वैज्ञानिक एवं अनुसंधान प्रवृत्ति वाले लोग उपलब्ध करवाती है । यह आर्थिक विकास की प्रक्रिया को लक्षित करती है ।

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इस प्रकार की शिक्षा का विकास प्रवृतिक होना आवश्यक है जो शिक्षा देश में उपलब्ध नहीं है । उस उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिये लोगों को विदेशों में भेजा जाना चाहिये । वयस्क शिक्षा और प्रशिक्षण मानवीय साधनों के विकास कार्यक्रम का एक अन्य अभिन्न भाग है ।

सेवा दौरान प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिये । दुर्लभ निपुणताओं के विकास के लिये विशेष प्रोत्साहन दिये जाने चाहिये । विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का विस्तृत प्रबन्ध किया जाना चाहिये ।

3. गृह निर्माण का विकास (Housing Development):

लोगों के लिये गृह निर्माण की सुविधाओं का विकास मानवीय निवेश का अन्तिम संघटक है क्योंकि गृह निर्माण का विकास मानवीय साधनों के विकास का एक महत्वपूर्ण निर्धारक है क्योंकि सुखद जीवन व्यक्ति को उत्पादन का बेहत अभिकर्त्ता बनाता है ।

परन्तु अल्पविकसित देशों में श्रमिकों को स्वास्थ्यकारी जीवन परिस्थितियां उपलब्ध करवाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिये । निजी गृह निर्माण को विशेष प्रोत्साहन उपलब्ध करवाया जाना चाहिये । इन देशों में आर्थिक सहायता प्रान्त गृह प्रबन्ध योजनाएं महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।